डीएमसीएच में मानवता तार-तार: लावारिस मरीज को फर्श पर घसीटने का वीडियो सामने आया,

ट्रॉली उपलब्ध होने के बावजूद सुरक्षा कर्मी ने मरीज को हाथ पकड़कर फर्श पर घसीटा, तीन दिनों से इलाज के इंतजार में पड़ा था युवक

दस्तक 7मीडिया /अफजल खान 

डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में शुक्रवार को मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया। गंभीर हालत में इलाज के लिए पहुंचे एक लावारिस मरीज को ट्रॉली से ले जाने के बजाय सुरक्षा कर्मी द्वारा फर्श पर घसीटकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का मामला सामने आया है। घटना का दृश्य सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था और लावारिस मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरीज को आर्थोपेडिक इमरजेंसी से ट्रायज एरिया की ओर ले जाने के लिए कहा गया था। मरीज को वहां पहुंचाने के लिए ट्रॉली मंगाने के बजाय एक सुरक्षा कर्मी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे फर्श पर घसीटते हुए ट्रायज एरिया तक ले गया। बताया जाता है कि इमरजेंसी विभाग में कई ट्रॉलियां मौजूद थीं। इसके बावजूद मरीज के लिए ट्रॉली का इस्तेमाल नहीं किया गया।

मौके पर मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने जब यह दृश्य देखा तो वे भी हैरान रह गए। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा किया जाता है, लेकिन इस घटना ने व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर दिया है।

तीन दिनों से इमरजेंसी में पड़ा था मरीज

जानकारी के अनुसार, उक्त युवक को करीब तीन दिन पहले पुलिस द्वारा डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। युवक ने खुद को झंझारपुर का रहने वाला बताया है। हालांकि, वह अपने बारे में इससे अधिक जानकारी देने की स्थिति में नहीं है। बताया जा रहा है कि तीन दिनों से अस्पताल परिसर में रहने के बावजूद उसका विधिवत दाखिला नहीं किया गया था।

स्थानीय लोगों और वहां मौजूद कुछ मरीजों के परिजनों द्वारा पांच-पांच रुपये का पुर्जा कटाकर उसका इलाज कराने की बात भी सामने आई है। सवाल यह है कि तीन दिनों से अस्पताल में मौजूद इस मरीज की नियमित देखभाल और इलाज की जिम्मेदारी किसकी थी और इतने समय तक उसे भर्ती क्यों नहीं कराया गया।

लावारिस मरीजों के लिए व्यवस्था के बावजूद बदहाल स्थिति

अस्पतालों में लावारिस मरीजों के इलाज, दवा और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है। ऐसे मरीजों की पहचान और देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी व्यवस्था किए जाने की बात कही जाती है। इसके बावजूद डीएमसीएच जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में एक लावारिस मरीज का तीन दिनों तक समुचित इलाज और भर्ती की प्रक्रिया से बाहर रहना गंभीर सवाल खड़े करता है।

घटना का दूसरा पहलू यह है कि मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ट्रॉली उपलब्ध होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। यदि मरीज चलने की स्थिति में नहीं था तो उसे स्ट्रेचर या ट्रॉली से सुरक्षित तरीके से ले जाना अस्पताल कर्मियों की जिम्मेदारी थी। फर्श पर घसीटकर ले जाने की घटना ने अस्पताल में मरीजों की गरिमा और मानवीय व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

अधीक्षक ने लिया संज्ञान

मामले में डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने कहा कि इमरजेंसी विभाग में मरीजों की सुविधा के लिए हेल्थ मैनेजर की तैनाती की गई है। मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए ट्रॉली की पर्याप्त व्यवस्था है। इस तरह मरीज के साथ व्यवहार किया जाना उचित नहीं है।

उन्होंने बताया कि हेल्थ मैनेजर को मरीज को तत्काल भर्ती कराने और उसका समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जा रहा है। साथ ही मरीज को फर्श पर घसीटकर ले जाने वाले सुरक्षा कर्मी की पहचान कर उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह है कि आखिर तीन दिनों तक अस्पताल में मौजूद इस लावारिस मरीज की सुध क्यों नहीं ली गई और ट्रॉली उपलब्ध होने के बावजूद उसे फर्श पर घसीटकर क्यों ले जाया गया। घटना ने डीएमसीएच की इमरजेंसी व्यवस्था में मरीजों की देखभाल, निगरानी और मानवीय संवेदनशीलता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।