बिहार में 49 कंपनियों का दंगा निरोधी बल तैयार, सूचना मिलते ही 20 मिनट में पहुंचेगा दस्ता

दस्तक 7मीडिया /पटना 

भीड़ हिंसा, हिंसक प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव जैसी घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण के लिए बिहार पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय ने राज्य में जिला दंगा निरोधी बल (डीएआरएफ) की 49 कंपनियों के गठन का फैसला लिया है। सूचना मिलते ही विशेष बल को अधिकतम 20 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य स्थिति के गंभीर रूप लेने से पहले ही प्रभावी कार्रवाई करना है।

संवेदनशीलता के आधार पर जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा

दंगा निरोधी बल की तैनाती जिलों की संवेदनशीलता के आधार पर ए, बी और सी श्रेणी में की गई है। उच्च संवेदनशीलता वाले 12 जिलों में पटना को तीन कंपनियां और 18 वाहन दिए जाएंगे। गया, मुजफ्फरपुर, सारण और भागलपुर समेत अन्य जिलों को दो-दो कंपनियां और 12-12 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

मध्यम संवेदनशीलता वाले 22 जिलों में नालंदा, वैशाली, सिवान, पूर्णिया और मुंगेर समेत अन्य जिलों को एक-एक कंपनी और छह-छह वाहन दिए जाएंगे। वहीं कम संवेदनशीलता वाले छह जिलों में एक-एक प्लाटून तथा दो-दो वाहन की व्यवस्था होगी।

हर कंपनी में 47 जवान, तीन प्लाटून

प्रत्येक कंपनी में तीन प्लाटून होंगे और कुल 47 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। जवानों को दंगा नियंत्रण के लिए आधुनिक आंसू गैस उपकरण, लाठी और अन्य आवश्यक संसाधनों से लैस किया जाएगा। जरूरत के अनुसार महिला पुलिसकर्मी और मेडिकल टीम भी बल के साथ उपलब्ध रहेगी।

बल के त्वरित आवागमन के लिए पूरे राज्य में 294 विशेष वाहनों की व्यवस्था की जा रही है। घटनास्थल पर पुलिस की कार्रवाई और उपद्रव की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी, ताकि बाद में आरोपियों की पहचान और कानूनी कार्रवाई में डिजिटल साक्ष्य का इस्तेमाल किया जा सके।

एक महीने की विशेष ट्रेनिंग, हर तीन महीने में रिफ्रेशर

चयनित जवानों को जिला पुलिस केंद्रों पर एक महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं बल के मास्टर ट्रेनरों को मेरठ स्थित रैपिड एक्शन फोर्स की अकादमी में प्रशिक्षित किया जाएगा। जवानों की दक्षता बनाए रखने के लिए हर तीन महीने में एक सप्ताह का रिफ्रेशर प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

हाल के हिंसक प्रदर्शनों और बदलती कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के बीच बिहार पुलिस की यह नई व्यवस्था जिलों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।