देखरेख के अभाव और जलजमाव की भेंट चढ़ रही करोड़ों की सड़कें, दरभंगा-कुशेश्वरस्थान एस एच-56 समेत ग्रामीण सड़कों का बुरा हाल

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।


करोड़ों रुपये बहाकर स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों का निर्माण तो बड़े-बड़े दावों के साथ कर दिया जाता है, लेकिन देखरेख और ढुलमुल रवैये के कारण ये सड़कें बनते ही बदहाली की शिकार हो जाती हैं। करोड़ों की लागत से बनी सड़कें कुछ ही महीनों में गड्डों में तब्दील हो रही हैं, और संबंधित विभाग चैन की नींद सोया हुआ है।
सड़कों के समय से पहले ध्वस्त होने की सबसे बड़ी वजह वर्षा के मौसम में जल निकासी का न होना है। सड़क किनारे बसे लोगों द्वारा निजी जमीनों और ढांचों को मनमाने ढंग से ऊंचा कर लिया गया है। नाले की व्यवस्था न होने और पानी का बहाव रुकने से सारा पानी सड़कों पर ही जमा रहता है। अलकतरा से बनी सड़कों का सबसे बड़ा दुश्मन पानी ही है, जिससे सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगती हैं और देखते ही देखते करोड़ों का ढांचा जमींदोज हो जाता है।
यह समस्या केवल किसी एक गांव तक सीमित नहीं है। दरभंगा-कुशेश्वरस्थान स्टेट हाईवे (SH-56) इसका जीता-जागता प्रमाण है। इस मुख्य मार्ग के अलावा आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों की सड़कों का भी यही हाल है। जिला प्रशासन और संबंधित विभाग (पथ निर्माण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग) इस विकराल होती समस्या से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं।
अतिक्रमण और अवैध रूप से ऊंचा किए गए ढांचों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सड़क निर्माण के समय नाले का ठोस ब्लूप्रिंट नहीं बनाया जाता।देखरेख के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। अगर समय रहते इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया गया, तो जनता के पैसों की यह बर्बादी यूं ही जारी रहेगी। विभाग को तुरंत एक्शन लेते हुए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए–
1.जल निकासी का प्रबंध,सड़क किनारे पक्के नालों का निर्माण कर पानी का बहाव सुनिश्चित किया जाए।
2. सड़क के जल प्रवाह को बाधित करने वाले निर्माणों पर सख्त कार्रवाई हो।
3. घटिया निर्माण या मेंटेनेंस न करने वाली एजेंसियों पर जुर्माना लगाया जाए। सड़कें विकास की जीवन रेखा होती हैं, लेकिन जब तक कुंभकर्णी नींद में सोया विभाग जागेगा नहीं, तब तक ये सड़कें इसी तरह भ्रष्टाचार और उपेक्षा के पानी में डूबती रहेंगी।