रिश्वत लेते पकड़े गए एसडीईओ को तीन साल की सजा, 25 हजार रिश्वत लेते 2010 में हुए थे गिरफ्तार, कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
रिश्वत लेते पकड़े गए एसडीईओ को तीन साल की सजा, 25 हजार रिश्वत लेते 2010 में हुए थे गिरफ्तार, कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
रिश्वत लेते पकड़े गए एसडीईओ को तीन साल की सजा,
25 हजार रिश्वत लेते 2010 में हुए थे गिरफ्तार, कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
दस्तक 7मीडिया ,पटना/
निगरानी के रिश्वतखोरी के मामले में विशेष निगरानी अदालत ने वर्तमान अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी, दलसिंहसराय (समस्तीपुर) विनोद कुमार विमल को दोषी करार देते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर कुल 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर चार माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों धाराओं में सुनाई गई सजा साथ-साथ चलेगी।
विशेष न्यायालय निगरानी, पटना के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने मंगलवार को निगरानी थाना कांड संख्या 13/2010 (विशेष वाद संख्या 10/2010) में यह फैसला सुनाया। मामला वर्ष 2010 का है। विद्यालय निरीक्षण के दौरान कैश बुक, साइट बुक समेत अन्य कागजात जब्त करने के बाद उन्हें लौटाने और कार्रवाई नहीं करने के एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप विनोद कुमार विमल पर लगा था।
शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 10 फरवरी 2010 को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। मामले के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस उपाधीक्षक मृत्युंजय कुमार चौधरी ने समय पर आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से 11 गवाहों की गवाही कराई गई।
बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक निगरानी विजय भानू ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन साल सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी तीन साल सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
11 मामलों में भी हुई दोषसिद्धि
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जारी जानकारी के अनुसार रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य मामलों में सीताराम चौधरी, जयराम सिंह, नरेश प्रसाद, सुदामा राय, राम नरेश प्रसाद, कृष्णदेव पासवान, लाल बाबू प्रसाद, ओम प्रकाश, धरनीधर राय, अशोक पासवान और भोला पासवान समेत कुल 11 मामलों में अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इन मामलों में रिश्वत की राशि 1,500 रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक थी।
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