ईओयू का होगा राज्यव्यापी विस्तार, अब रेंज से लेकर जिले तक कसेगा आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा

दस्तक 7मीडिया /पटना 

बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) का दायरा अब राज्य के सभी 12 पुलिस रेंज और जिला स्तर तक बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के इस फैसले का उद्देश्य माफियाओं की काली कमाई, भ्रष्टाचार और संगठित आर्थिक अपराधों पर स्थानीय स्तर पर ही प्रभावी कार्रवाई करना है। इसके तहत हर जिले में आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की निगरानी और जांच के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।

12 पुलिस रेंज में गठित होंगी विशेष इकाइयां

पटना मुख्यालय के अलावा सेंट्रल, मगध, शाहाबाद, तिरहुत, चंपारण, सारण, मिथिला, कोशी, पूर्णिया, पूर्वी, मुंगेर और बेगूसराय रेंज में ईओयू की विशेष इकाइयां गठित की जाएंगी। वहीं, प्रत्येक जिले में पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी को पुलिस निरीक्षक आर्थिक अपराध के रूप में नामित किया जा रहा है। इससे जमीन, बालू और शराब माफिया की बेनामी संपत्ति, वित्तीय फर्जीवाड़े और अवैध लेन-देन से जुड़ी सूचनाओं पर स्थानीय स्तर पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी।

सीमावर्ती जिलों में आर्थिक खुफिया तंत्र मजबूत

भारत-नेपाल और बंगाल सीमा से सटे आठ जिलों के 14 पुलिस अनुमंडलों में सीमा क्षेत्रीय आर्थिक खुफिया इकाई का गठन किया गया है। यह इकाई संबंधित जिलों के एसपी के साथ समन्वय कर नकली नोट, साइबर अपराध, तस्करी और वित्तीय अपराधों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक अपराध के नेटवर्क पर नजर रखना इसका प्रमुख उद्देश्य होगा।

दो नई विशेष शाखाओं से बढ़ेगी कार्रवाई

ईओयू के तहत दो नई विशेष शाखाओं को भी सक्रिय किया गया है। बौद्धिक संपदा अपराध शाखा नकली सामान, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई करेगी। वहीं संपत्ति समपहरण एवं राजसात शाखा अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों की अवैध संपत्तियों को जब्त करने और कानून के तहत राजसात कराने की कार्रवाई पर ध्यान देगी।

अपराधियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की तैयारी

बिहार पुलिस की रणनीति अब अपराधियों को केवल गिरफ्तार कर जेल भेजने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी आर्थिक ताकत पर भी सीधा प्रहार किया जाएगा। ईओयू ने काली कमाई से संपत्ति अर्जित करने वाले 250 से अधिक माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय को धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत प्रस्ताव भेजा है।

पुलिस का मानना है कि अपराधियों की आर्थिक फंडिंग पर चोट कर उनके पूरे नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है। ईओयू के राज्यव्यापी विस्तार के बाद आर्थिक अपराधों की पहचान, जांच और अवैध संपत्ति पर कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।