जमीन की बकाया रकम न देना मात्र ‘धोखाधड़ी’ नहीं, सिविल विवाद: पटना हाईकोर्ट

दस्तक 7 मीडिया ,पटना /विधि संवाददाता 

पटना हाईकोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि जमीन सौदे में बकाया रकम का भुगतान नहीं करना अपने आप में धोखाधड़ी का आपराधिक मामला नहीं बनता। अदालत ने कहा कि केवल अनुबंध का उल्लंघन होने से मामला आपराधिक नहीं हो जाता। धोखाधड़ी का मामला तभी बन सकता है, जब यह साबित हो कि आरोपी की नीयत अनुबंध या सौदा करते समय से ही धोखा देने की थी।

न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की एकल पीठ ने कहा कि लेनदेन पूरा नहीं होने या बकाया राशि का भुगतान नहीं किए जाने का विवाद मूल रूप से दीवानी प्रकृति का हो सकता है। ऐसे मामलों में रकम की वसूली के लिए दीवानी अदालत का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन हर अनुबंध विवाद को आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।

2.26 करोड़ में तय हुआ था जमीन का सौदा

मामला सीवान जिले से जुड़ा है। 15 जनवरी 2021 को पांच कट्ठा जमीन का सौदा 2.26 करोड़ रुपये में तय हुआ था। खरीदार ने 20 लाख रुपये अग्रिम दिए। इसके बाद कुल छह कट्ठा छह धुर जमीन की रजिस्ट्री ललिता देवी के नाम कराई गई, जिसके बदले 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

विक्रेता के अनुसार जमीन की कीमत और अतिरिक्त जमीन की गणना के बाद करीब 90.20 लाख रुपये की राशि बकाया रह गई। रकम का भुगतान नहीं होने पर विक्रेता की ओर से धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आपराधिक कार्रवाई की गई।

शुरुआत से गलत नीयत साबित करना जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के आपराधिक मामले में यह महत्वपूर्ण है कि आरोपी की शुरुआत से ही गलत नीयत थी या नहीं। बाद में भुगतान न करना या अनुबंध की शर्त पूरी नहीं करना मात्र इस आधार पर धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता।अदालत ने योगेश कुमार सिंह की ओर से दायर मुकदमा रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन फैसले में यह सिद्धांत स्पष्ट किया कि बकाया रकम की वसूली का रास्ता दीवानी अदालत में उपलब्ध है। सिर्फ भुगतान संबंधी विवाद को आपराधिक मामला बनाकर आरोपी पर धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगाया जा सकता।