बिजली बिल बकाया पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, बिना छेड़छाड़ के नहीं बनेगा बिजली चोरी का केस
बिजली बिल बकाया पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, बिना छेड़छाड़ के नहीं बनेगा बिजली चोरी का केस
बिजली बिल बकाया पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, बिना छेड़छाड़ के नहीं बनेगा बिजली चोरी का केस
दस्तक 7 मीडिया ,पटना /विधि संवाददाता
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ बिजली बिल का भुगतान नहीं करना विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत आपराधिक बिजली चोरी नहीं माना जा सकता। जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ ने मोहम्मद शाहिद इमाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि बिजली चोरी का आपराधिक मामला बनाने के लिए उपभोक्ता की बेईमान मंशा और बिजली चोरी के ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। मीटर से छेड़छाड़, लाइन को बाईपास करना या अवैध कनेक्शन जैसे प्रमाण के बिना केवल बकाया बिल के आधार पर धारा 135 के तहत आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
धारा 126 के तहत नागरिक देनदारी
यदि मीटर सामान्य रूप से चल रहा है और उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है, तो अनधिकृत उपयोग का मामला धारा 126 के तहत माना जा सकता है। यह मुख्य रूप से नागरिक देनदारी का मामला है, आपराधिक चोरी का नहीं।
बिजली विभाग कर सकता है वसूली
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग बकाया राशि की वसूली के लिए नागरिक कार्रवाई कर सकता है और नियमानुसार बिजली कनेक्शन काट सकता है, लेकिन महज बिल बकाया रहने को आधार बनाकर आपराधिक बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता।
क्या था मामला
मोहम्मद शाहिद इमाम पर करीब 5.34 लाख रुपये बिजली बिल बकाया होने के बावजूद अवैध रूप से बिजली इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए नवादा टाउन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित उपभोक्ता का मीटर सुरक्षित था और उससे किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने प्राथमिकी को पूरी तरह निरस्त कर दिया।