नीट धांधली की जांच तेज, 12 सदस्यीय एसआईटी ने कसा शिकंजा, बिहार समेत कई राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के छात्र जांच के घेरे में, सॉल्वर गैंग के नेटवर्क की पड़ताल
नीट धांधली की जांच तेज, 12 सदस्यीय एसआईटी ने कसा शिकंजा, बिहार समेत कई राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के छात्र जांच के घेरे में, सॉल्वर गैंग के नेटवर्क की पड़ताल
नीट धांधली की जांच तेज, 12 सदस्यीय एसआईटी ने कसा शिकंजा,
बिहार समेत कई राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के छात्र जांच के घेरे में, सॉल्वर गैंग के नेटवर्क की पड़ताल
दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा
नीट-यूजी 2026 और री-नीट परीक्षा में कथित धांधली के मामले में बिहार आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जांच तेज कर दी है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए ईओयू ने डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 12 सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है। टीम बिहार के साथ-साथ देश के कई मेडिकल कॉलेजों के छात्रों और कथित सॉल्वर गैंग के नेटवर्क की छानबीन कर रही है।
जांच के दौरान ईओयू ने पटना और आसपास के इलाकों से मामले से जुड़े कई आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पावापुरी का एमबीबीएस अंतिम वर्ष का छात्र डॉ. उज्जवल राज शामिल है। उसे पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से पकड़ा गया। वहीं डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को लखीसराय और री-नीट केंद्रों पर हुई कथित धांधली का मुख्य सरगना बताया जा रहा है। उसके भाई अश्विनी कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
12 से 30 लाख रुपये तक होता था सौदा
जांच में सामने आया है कि कथित सॉल्वर गैंग मेडिकल कॉलेजों के मेधावी छात्रों को असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठाता था। इसके लिए प्रति अभ्यर्थी 12 से 30 लाख रुपये तक का सौदा होने की बात सामने आई है। ईओयू अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े छात्रों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
कई मेडिकल कॉलेजों के छात्र रडार पर
ईओयू ने श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मुजफ्फरपुर के दो छात्रों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। इनके बैंक खातों और कॉल डिटेल की भी जांच की जा रही है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमबीबीएस चौथे वर्ष के एक छात्र को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह बायोमेट्रिक सत्यापन टीम के साथ मिलकर कथित धांधली में शामिल था। नालंदा मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्रों की भूमिका भी जांची जा रही है।
जांच का दायरा बिहार से बाहर भी फैल गया है। उत्तर प्रदेश के एम्स रायबरेली, एएन मगध मेडिकल कॉलेज, पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज और मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज सतना के छात्रों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि इन संस्थानों से जुड़े कुछ छात्र लखीसराय के परीक्षा केंद्रों पर फर्जी परीक्षार्थी के रूप में बैठे थे।
बायोमेट्रिक जांच में भी सेंध की आशंका
ईओयू की जांच में परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में कथित हेरफेर की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि असली अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन बाहर कराया जाता था और अंदर जाने वाले सॉल्वर का अंगूठा मशीन से सत्यापित नहीं होने पर कथित तौर पर मैनुअल बाईपास के जरिए उसे परीक्षा में बैठाया जाता था।
गिरफ्तार आरोपितों और कथित सॉल्वरों के पास से फर्जी प्रवेश पत्र, जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र समेत कई दस्तावेज मिलने की बात कही गई है।
एनटीए से मांगी जा रही अभ्यर्थियों की जानकारी
एसआईटी अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से संदिग्ध अभ्यर्थियों के रोल नंबर और अन्य विवरण साझा कर रही है। इन जानकारियों के आधार पर संदिग्ध छात्रों को नोटिस भेजकर पूछताछ की जा रही है। ईओयू का फोकस इस पूरे संगठित नेटवर्क के मास्टरमाइंड, सॉल्वर, बिचौलियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सहयोगियों की पहचान कर कार्रवाई करने पर है।
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