आजादी दिवस की पूर्व संध्या पर बिरौल में गरजा गरीबों का गुस्सा, ‘बुलडोजर राज’ के खिलाफ खेग्रामस का सत्याग्रह

दस्तक 7 मिडिया बिरौल, दरभंगा।

देश के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बिरौल प्रखंड मुख्यालय में दलितों, गरीबों, ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं के आक्रोश का बड़ा सैलाब देखने को मिला। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के राज्यव्यापी आह्वान पर 13 और 14 अगस्त को आयोजित दो दिवसीय अनशन-सत्याग्रह के तहत बिरौल प्रखंड परिसर में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की ‘बुलडोजर नीति’ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गरीबों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़े जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
धरनास्थल पर वक्ताओं ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष गरीबों और भूमिहीनों के जीवन से जुड़ी बुनियादी मांगों को मजबूती से रखा।
वर्षों से बसे हुए गरीब और दलित परिवारों को बेदखल करने की कार्रवाई तुरंत बंद की जाए और पीपी एक्ट के तहत उन्हें अविलंब बासगीत पर्चा दिया जाए। प्रखंड के प्रत्येक पंचायत में भूमिहीन परिवारों को बसाने के लिए विशेष आवासीय कॉलोनी बनाई जाए और हर गरीब परिवार को कम से कम 5 डिसमिल आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीण गरीबों के लिए मनरेगा व ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत नियमित काम और काम का उचित दाम सुनिश्चित किया जाए। राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, बुजुर्गों व असहायों को समय पर पेंशन, हर घर तक शुद्ध पेयजल और सरकारी विद्यालयों में बदहाल शिक्षा व्यवस्था में त्वरित सुधार किया जाए।
भाकपा (माले) बिरौल प्रखंड सचिव बैद्यनाथ यादव ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा आजादी के दशकों बाद भी अगर दलित-गरीब अपने सिर पर छत और दो वक्त की रोटी के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। सरकार गरीबों के आशियाने पर बुलडोजर चलाने की नीति छोड़ दे। जमीन, आवास, भोजन और रोजगार गरीबों का बुनियादी हक है, जिसे हम हर हाल में छीनकर रहेंगे।धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख रूप से कमिटी सदस्य जीतेन्द्र सदा, सत्यनारायण पासवान,पवित्र देवी,बुची दाय देवी,
फूल पारी देवी,मो.पबीय देवी,सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और भूमिहीन परिवार उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रखंड प्रशासन और सरकार ने उनकी लंबित मांगों पर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह अनशन-सत्याग्रह आने वाले दिनों में और अधिक उग्र जन-आंदोलन का रूप लेगा।