एंबुलेंस बनी शराब तस्करी का नया ठिकाना, सायरन बजाकर दौड़ रहे थे तस्कर,

गुप्त तहखाने में छिपाकर हो रही थी शराब की ढुलाई, कई जिलों में पुलिस ने खोला तस्करी का राज

दस्तक 7 मीडिया /पटना

बिहार में शराब तस्करों ने पुलिस की नजर से बचने के लिए तस्करी का नया तरीका अपना लिया है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस अब शराब की खेप ढोने का जरिया बनाई जा रही है। एंबुलेंस में मरीज के बेड और सीटों के नीचे ही नहीं, बल्कि छत और बॉडी में गुप्त तहखाने तक बनाए जा रहे हैं। सायरन और नीली बत्ती का इस्तेमाल कर तस्कर पुलिस की चेकिंग से आसानी से निकलने की कोशिश करते हैं। हाल के दिनों में शेखपुरा, गोपालगंज, बगहा, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर में हुई कार्रवाई ने इस नेटवर्क की तस्वीर सामने ला दी है।

शेखपुरा में सरकारी एंबुलेंस से 239 बोतल शराब बरामद

13 अगस्त को शेखपुरा में उत्पाद विभाग की टीम ने नवादा से शेखपुरा आ रही एक सरकारी एंबुलेंस को करीब एक किलोमीटर पीछा करने के बाद पकड़ा। तलाशी के दौरान मरीज के बेड के नीचे छिपाकर रखी गई 239 बोतल यानी 10 कार्टन विदेशी शराब बरामद हुई। मामले में लखीसराय निवासी चालक प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान बाइक सवार लाइनरों ने पुलिस से भिड़कर चालक को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उनका प्रयास विफल रहा।

गोपालगंज में 510 लीटर शराब के साथ चालक गिरफ्तार

7 अगस्त को कुचायकोट पुलिस ने पहाड़पुर गांव के पास नीली बत्ती और सायरन बजाकर आ रही उत्तर प्रदेश की एंबुलेंस को रोककर तलाशी ली। एंबुलेंस से 510 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। पुलिस ने चालक विकू कुमार को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में प्रति खेप 10 हजार रुपये मिलने की बात सामने आई। शराब की खेप बेगूसराय भेजी जानी थी।

बगहा में सीटों के नीचे छिपाई थी 157 लीटर शराब

29 जुलाई को बगहा के नदी थाना क्षेत्र स्थित रोहुआ नाला चेकपोस्ट पर जांच के दौरान एंबुलेंस से 157 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की गई। शराब सीटों के नीचे छिपाकर रखी गई थी। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर निवासी चालक रिजवान अंसारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर में भी खुल चुका है खेल

जुलाई में सीतामढ़ी में एंबुलेंस से 413 बोतल शराब बरामद की गई थी। वहीं, मुजफ्फरपुर के कांटी क्षेत्र में एंबुलेंस की छत में बनाए गए गुप्त तहखाने से करीब 10 लाख रुपये मूल्य की 40 कार्टन विदेशी शराब पकड़ी गई थी। शराब की खेप सिलीगुड़ी से लाई जा रही थी।

सायरन बजाकर चेकिंग से निकलने की कोशिश

जांच में सामने आया है कि तस्कर एंबुलेंस को इस तरह तैयार करते हैं कि पहली नजर में वह मरीज ढोने वाला सामान्य वाहन ही लगे। पुलिस की नाकेबंदी देखते ही सायरन और नीली बत्ती का इस्तेमाल कर रास्ता साफ कराने की कोशिश की जाती है। अंतरराज्यीय सीमा पार करने के दौरान कई बार नंबर प्लेट बदलने की बात भी सामने आई है।

एंबुलेंस के आगे चलती हैं पायलट गाड़ियां

तस्करी के इस नेटवर्क में केवल चालक ही शामिल नहीं हैं। कई मामलों में एंबुलेंस के आगे लग्जरी वाहन या बाइक सवार लाइनर चलते हैं। इनका काम रास्ते में पुलिस की चेकिंग और नाकेबंदी की जानकारी तस्करों तक पहुंचाना होता है। रास्ता साफ मिलने पर एंबुलेंस को आगे बढ़ाया जाता है।

ड्राइवरों से पूछताछ में बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

पुलिस और उत्पाद विभाग अब गिरफ्तार चालकों से पूछताछ के आधार पर शराब के इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटे हैं। जांच एजेंसियों की नजर शराब उपलब्ध कराने वालों, एंबुलेंस की व्यवस्था करने वालों, लाइनरों और खेप को गंतव्य तक पहुंचाने वाले लोगों पर है। अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार चालकों से पूछताछ के बाद शराब तस्करी के बड़े बैकवर्ड और फॉरवर्ड नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।