विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में शिक्षक-कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन,

500 कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से अलग कर सरकारी नियंत्रण में लाने के प्रस्ताव पर विरोध, 25 अगस्त तक जारी रहेगा आंदोलन

दस्तक 7 मीडिया /पटना

बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026’ के विरोध में राज्यभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी आंदोलनरत हैं। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा सहित फुटाब और फुस्टाब समेत विभिन्न शिक्षक संगठनों के नेतृत्व में अगस्त में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित कानून लागू होने से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होगी। प्रस्ताव में स्नातक स्तर के करीब 500 कॉलेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों से अलग कर सीधे राज्य सरकार के नियंत्रण में लाने की बात कही गई है। संगठनों का कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों की भूमिका और अधिकार सीमित हो जाएंगे।

सेवा शर्तों और अधिकारों पर भी जताई चिंता

आंदोलनकारियों ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अधिकार, सेवा शर्तों और हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों और मांगों के लिए भी शिक्षकों-कर्मचारियों को विश्वविद्यालय स्तर पर समाधान के बजाय सचिवालय का रुख करना पड़ सकता है।

शिक्षक संगठनों के अनुसार, पटना विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेज यदि सीधे सरकार के अधीन चले जाते हैं तो स्नातक स्तर पर विश्वविद्यालयों की भूमिका काफी सीमित हो जाएगी।

25 अगस्त तक चलेगा आंदोलन

संगठनों की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार 5 से 8 अगस्त तक शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर काम किया। 10 अगस्त को विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर सामूहिक अवकाश लेकर आक्रोश मार्च निकाला गया।

11 से 25 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 1:30 से 2 बजे तक कार्यस्थल पर घंटी बजाकर प्रस्तावित कानून के विरोध में नारेबाजी की जा रही है। वहीं 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर छात्रों और अभिभावकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई है।

कुलसचिवों को सौंपा ज्ञापन

प्रस्तावित कानून को वापस लेने की मांग को लेकर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में विरोध दर्ज कराया जा रहा है। टीएमबीयू भागलपुर, गया कॉलेज और मुजफ्फरपुर समेत कई स्थानों पर कुलसचिवों को ज्ञापन सौंपकर सरकार से प्रस्तावित अधिनियम को वापस लेने की मांग की गई है।

शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को आगे भी तेज किया जा सकता है।