ऑनलाइन हिंसा और डीपफेक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को आपातकालीन तंत्र बनाने का निर्देश

दस्तक 7 मीडिया /नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन हिंसा, डीपफेक, डॉक्सिंग और गंभीर साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों को समयबद्ध आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि उपचार में देरी न्याय से इनकार के समान है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में ऑनलाइन माध्यम से दी जा रही दुष्कर्म, हत्या और शारीरिक हमले की धमकियों के अलावा निजी जानकारी सार्वजनिक करने, डीपफेक और प्रतिरूपण जैसे गंभीर साइबर अपराधों का मुद्दा उठाया गया था।

तीन मंत्रालयों को ज्ञापन की समीक्षा का निर्देश

पीठ ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय को याचिकाकर्ता की ओर से सौंपे गए ज्ञापन का गंभीरता से परीक्षण करने को कहा। अदालत ने कहा कि तकनीकी प्रकृति के इन अपराधों से निपटने और उनकी पहचान के लिए विशेषज्ञों की भूमिका अहम है। इसलिए सरकार को बिना अनावश्यक देरी के प्रभावी और उपचारात्मक कदम उठाने चाहिए।

धमकी से लेकर डीपफेक तक चिंता

अदालत के समक्ष ऑनलाइन हिंसा के कई गंभीर रूपों का मुद्दा उठाया गया। इनमें इंटरनेट पर दुष्कर्म, हत्या या शारीरिक हमले की धमकी देना, बच्चों के स्कूल की जानकारी और घर का पता सार्वजनिक करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से अश्लील सामग्री तैयार करना तथा किसी व्यक्ति की झूठी पहचान बनाकर उसे नुकसान पहुंचाना शामिल है। ऐसे अपराध नागरिकों के निजता, जीवन और समानता के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।

हानिकारक सामग्री हटाने के लिए त्वरित व्यवस्था जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने वाला ढांचा तैयार करने को कहा है, ताकि गंभीर और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री की शिकायत मिलने पर आवश्यक कदम तेजी से उठाए जा सकें।

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर भी सख्ती

इससे पहले चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने साइबर ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों का स्वत: संज्ञान लेते हुए भी कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक को फर्जी खातों के जरिये ठगी की रकम के हस्तांतरण पर रोक लगाने के लिए चार सप्ताह के भीतर मानक संचालन प्रक्रिया जारी करने को कहा था। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साइबर ठगी के पीड़ितों की शिकायतों के त्वरित निपटारे और ठगी की रकम वापस दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए थे।