सुपौल पंचायत में पिछले 2 वर्षों से थमा सफाई कार्य, कचरे के ढेर में तब्दील हुआ मुख्य बाजार, खेबा पुल घाट पर मंडराया महामारी का खतरा
सुपौल पंचायत में पिछले 2 वर्षों से थमा सफाई कार्य, कचरे के ढेर में तब्दील हुआ मुख्य बाजार, खेबा पुल घाट पर मंडराया महामारी का खतरा
सुपौल पंचायत में पिछले 2 वर्षों से थमा सफाई कार्य, कचरे के ढेर में तब्दील हुआ मुख्य बाजार, खेबा पुल घाट पर मंडराया महामारी का खतरा
दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता,दरभंगा।
पंचायती राज व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को स्वच्छ, सुंदर और आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण बिरौल प्रखंड की सुपौल पंचायत में यह व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। गांव-गांव में स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सफाई कर्मचारियों की अस्थायी नियुक्ति तो की गई थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से विभागीय आवंटन (फंड) न आने के कारण संपूर्ण पंचायत में साफ-सफाई का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
आवंटन के अभाव में सफाईकर्मियों का भुगतान रुकने से पंचायत की सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। आज स्थिति यह है कि सुपौल पंचायत के मुख्य बाजार से लेकर सभी वार्डों में जगह-जगह कचरे और गंदगी के विशाल ढेर लग चुके हैं। सड़ांध और बदबू के कारण स्थानीय दुकानदारों, राहगीरों और ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। नालियां जाम हैं, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों व महामारी फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सीमावर्ती नगर पंचायत पर भी असर,खेबा पुल घाट बना ‘डंपिंग यार्ड’–
सुपौल पंचायत की सीमा से सटे नगर पंचायत बिरौल पर भी इस कुव्यवस्था का सीधा और घातक असर पड़ रहा है। पंचायत में कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था न होने से आजिज आकर सुपौल पंचायत के अधिकांश ग्रामीण और व्यापारी अपने घरों व दुकानों का सारा गीला व सूखा कचरा खेबा पुल घाट में फेंकने को मजबूर हैं। इसके चलते जो गंदगी पंचायत तक सीमित रहनी चाहिए थी, वह अब नगर पंचायत बिरौल की सीमाओं और जलस्रोतों को भी तेजी से प्रदूषित कर रही है। पवित्र माने जाने वाले घाट और नदी का पानी जहरीला हो रहा है, जिससे आसपास का संपूर्ण पर्यावरण दूषित हो चुका है।
पिछले 24 महीनों से फंड का न आना और जनप्रतिनिधियों व संबंधित विभागीय अधिकारियों की इस गंभीर मुद्दे पर साध रखी गई चुप्पी, पंचायती राज के दावों की पोल खोल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सुपौल पंचायत के मुखिया मो. काशिफ उर्फ उजाला ने इस समस्या का पुष्टि करते हुए कहा कि विभाग को चाहिए कि जल्द ही फंड जारी कर सफाई व्यवस्था बहाल करें और खेबा पुल घाट को कचरा-मुक्त बनाया जाय।