जयनगर के डीएसपी पर स्थानीय लोंगों ने लगाये हैं कई आरोप ,पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर मधुबनी जिले के मुख्यालय डीएसपी को मिला हैं जांच का जिम्मा।
जयनगर के डीएसपी पर स्थानीय लोंगों ने लगाये हैं कई आरोप ,पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर मधुबनी जिले के मुख्यालय डीएसपी को मिला हैं जांच का जिम्मा।
दरभंगा /संजय कुमार राय
मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल मे पदस्थापित एसडीपीओ की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इनके खिलाफ आरोपों की परत दर परत हैं ,जिसकी जांच बिहार पुलिस मुख्यालय के आदेश पर मधुबनी जिला के मुख्यालय डीएसपी कर रहें हैं। सूत्रों के अनुसार जयनगर के एसडीपीओ विप्लव कुमार इन दिनों इलाके मे काफी सुर्खिया बटोर रहें हैं ,स्थानीय लोग इनके विरुद्ध लगातार आरोप प्रत्यारोप लगा हैं। इसी कड़ी मे जयनगर निवासी भूषण कुमार साह ने कई आरोप लगाते हुये एसडीपीओ के विरुद्ध 18जगहों पर आवेदन दिया हैं। उनके द्वारा मधुबनी के डीएम ,एसपी ,कमिश्नर ,आई जी ,डीजीपी ,मुख्यमंत्री ,उप मुख्यमंत्री ,मुख्य सचिव ,अपर मुख्यसचिव आदि कई जगहों पर आवेदन दिया गया। पुलिस मुख्यालय ने इस आवेदन के विरुद्ध जांच करने का आदेश दरभंगा क्षेत्र के आईजी को दिया। आईजी ने मधुबनी एसपी को जांच का निर्देश दिया ,मधुबनी एसपी ने इसकी जांच मुख्यालय डीएसपी प्रभाकर तिवारी को दिया हैं। मुख्यालय एसडीपीओ श्री तिवारी ने अपने ज्ञापांक 968दिनांक 22/9/23के माध्यम से जिला सचिव भूषण प्रसाद (वि0प्रा0 खै0म0यू0 )को अवगत कराते हुये कहा कि आवेदन पत्र मे वर्णित तथ्यों के आलोक मे 30/9/23को 11बजे लगाये गये आरोपों के संबंध मे साक्ष्य के साथ समाहरणालय स्थित अधोहस्ताक्षरी कार्यालय मे उपस्थित होने की कृपा करें।
इस आवेदन के प्राप्त होते ही भूषण प्रसाद ने 29/9/23को ही 138पन्ने का लिखित आवेदन जिसमें एसडीपीओ द्वारा किये गये पर्यवेक्षण मे की गई गलतियों एवं शराब माफियाओं से ताल्लुक रखने का सबूत तथ्यों के साथ पेश कर दिया हैं यही नहीं कूछ आडियो भी जांचकर्ता एसडीपीओ श्री तिवारी को भूषण ने उपलब्ध कराया हैं। ऐसे मे ऐसा लग रहा हैं कि जयनगर डीएसपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं । यही नहीं डीएसपी के यहां पदस्थापित एक जवान कैसे शराब माफियाओं से बात कर रहा हैं उसका भी ऑडियो जांच के क्रम मे श्री भूषण द्वारा मुख्यालय डीएसपी को उपलब्ध कराया गया हैं। अगर जांच के दौरान यह मामला सही पाया जाता हैं तो भविष्य मे इनका विकेट गिरना तय हैं।
बिहार मे बदल गया हैं पुलिसिंग का तरीका ?आम लोंगों का हैं बुरा हाल ,नये सिस्टम का हुआ हैं इजाद ,अब सरकारी नंबर पर कम, व्हाट्सएप नंबर पर ज्यादातर होती हैं बातें ?अधिकारियो की पोस्टिंग आम लोंगों के लिये हैं या फिर ………….??
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