बिहार मे बदल गया हैं पुलिसिंग का तरीका ?आम लोंगों का हैं बुरा हाल ,नये सिस्टम का हुआ हैं इजाद ,अब सरकारी नंबर पर कम, व्हाट्सएप नंबर पर ज्यादातर होती हैं बातें ?अधिकारियो की पोस्टिंग आम लोंगों के लिये हैं या फिर ………….??
बिहार मे बदल गया हैं पुलिसिंग का तरीका ?आम लोंगों का हैं बुरा हाल ,नये सिस्टम का हुआ हैं इजाद ,अब सरकारी नंबर पर कम, व्हाट्सएप नंबर पर ज्यादातर होती हैं बातें ?अधिकारियो की पोस्टिंग आम लोंगों के लिये हैं या फिर ………….??
दरभंगा ,संजय कुमार राय
बिहार मे पुलिसिंग के तरीके मे बदलाव को लेकर आम लोंगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यह पता नहीं चलता कि विभाग के अधिकारी आम जनता के लिये हैं या आम जनता के दोहन के लिये अधिकारी हैं। अगर सरकार की मानक क्षमता यही है ऐसे अधिकारियों से आम लोग तंग और तबाह हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के ज्यादातर पदाधिकारी अपने सरकारी नंबर को उठाकर शिकायतकर्ता से बात करते हैं।
लेकिन पुलिस विभाग मे आजकल नया सिस्टम डेवलप किया गया हैं और वह सिस्टम हैं व्हाट्सएप कॉल।
सरकार ने डीजीपी से लेकर थानाध्यक्ष तक फोन उपलब्ध कराया जो सरकारी नंबर से लोग अवगत हैं , ताकि आम लोग आसानी से अपनी शिकायत कहीं भी कर सकते हैं या फिर सूचना भी दे सकते हैं। अगर कोई आदमी देश या विदेश मे हैं और सरकारी नंबर के बारे उसे पता नहीं हैं तो वैसे लोग गूगल पर जाकर कहीं का भी नंबर खोज लेते हैं ,इस कारण लोंगों को आसानी होती हैं ।
लेकिन राज्य के ज्यादातर पुलिस पदाधिकारी अब इस नंबर का इस्तेमाल करना बंद कर दिया हैं ?इस कारण आम लोंगों की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। कुछ पुलिस पदाधिकारी आज भी सरकारी नंबर चला रहें हैं लेकिन आपका कॉल बस घंटी तक सीमित रह जाएगी लेकिन कुछ देर बाद फोन डयूटी पर तैनात पुलिस कर्मी आपको रिंग बेक करेगा और पूछता हैं ,आप कौन हैं और कहाँ से हैं। अगर पुलिस पदाधिकारी को मन होगा तो बात करेंगे वरना फोन डयूटी कहेंगे कि आप अपनी शिकायत दर्ज करा दीजिये। एक आध ऐसे वरीय पुलिस पदाधिकारी हैं जो आपके रिंग करते ही फोन उठा लेंगे और आपसे अच्छे से बात करेंगे ,इसका प्रभाव इतना पड़ता हैं कि फोनकर्ता गद गद हो जाते हैं और उनकी आधी समस्या वहीं समाप्त हो जाती हैं।
अब थाना से लेकर ऊपर के ज्यादातर पुलिस अधिकारी व्हाट्सएप काल करेंगे। मकसद यही रहता हैं कि उनकी बातों को कोई रिकार्ड नहीं कर ले और यही होता भी हैं। अब इस व्हाट्सएप काल का बुरा असर यह हैं कि इसपर काल आने और जानें वाले दोनों कॉल संदिग्ध हैं और इस कॉल पर अक्सर पदाधिकारी बात करते हैं।अक्सर इस कॉल से लेन देंन या अन्य बात की जाती हैं।इसके लिये पुलिस पदाधिकारी कई निजी मोबाईल का इस्तेमाल करते हैं।शराब माफियाओं ,या केश मे फंसे लोंगों को से लेकर सिर्फ अवैध उगाही की बात होती हैं ?अगर ऐसा नहीं हैं हैं तो फोन पर बात करने मे कैसी हिचकीचाहट। सरकार ने सरकारी नंबर को फोन से बात करने के लिये उपलब्ध कराया था ना कि व्हाट्सएप पर बात करने के लिये ?अगर ऐसे पदाधिकारियों का व्हाट्सएप कॉल डिटेल्स निकालकर सरकार जांच करें तो 85फीसदी से ज्यादा पदाधिकारियों के कारनामे सामने आ जाएंगे जो भूमाफिया हैं ,जो शराब के धंधे मे संलिप्त हैं ,या फिर अन्य मामलों के माफिया हैं। सही और शराफत से जी रहें या गणमान्य लोंगों के ना के बराबर इनके मोबाईल पर कॉल जाता हैं क्यूंकि अब शरीफ लोगों को थाना जानें से डर से लगता हैं ताकि कहीं उन्हीं को पुलिस निशाना ना बना दे।
यही नहीं ऐसे मामले उजागर करने वाले पत्रकार ,आरटीआई कार्यकर्ता या फिर और भी तरीके से सूचना संग्रह कर उसे उजागर करने वालों के विरुद्ध फर्जी मुकदमा कराकर पुलिस शांत कर देती हैं ,या फिर जेल भेज दिया जाता हैं या फिर गोली का शिकार बना दिया जाता हैं। इन दिनों हर एक पुलिसिया काम समाज के बीच उल्टे तरीकों मे किया जाता हैं ,भयादोहन किया जाता हैं और इसके आड़ मे उगाही की जाती हैं। यह एक मजबूत सिस्टम बन गया हैं जो भ्रष्ट लोंगों का हैं। आम लोंगों को इससे निजात कैसे मिलेगी यह सरकार को तय करना हैं।अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले वक्त मे लोंगों का जीना दूभर हो जाएगा।ऐसे मे सरकार द्वारा जन जन तक पहुंचने की बात ,पुलिस आपके द्वार तक ,विडिओ कॉन्फ्रेंस के जरिये आम जन से बातचीत आदि प्रभावित नहीं हैं बस लोंगों के बीच सरकार का प्रयास हैं जो ढकोसला हैं।यह प्रभावी नहीं हैं।