22 साल जेल में बिताने के बाद हत्या के आरोप से बरी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा -यह न्याय व्यवस्था की ‘सामूहिक विफलता’

दस्तक 7 मीडिया /दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसले में ओडिशा के अर्जुन जानी को हत्या के मामले से बरी कर दिया। अर्जुन जानी ने बिना किसी ठोस और विश्वसनीय सबूत के करीब 22 वर्ष जेल में बिताए। न्यायालय ने इस पूरे मामले को भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की “सामूहिक विफलता” करार देते हुए निचली अदालत और उच्च न्यायालय के रवैये पर गंभीर टिप्पणी की।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अर्जुन जानी को दोषी ठहराने का आधार केवल एक कथित प्रत्यक्षदर्शी (चश्मदीद) गवाह का बयान था, जिसकी विश्वसनीयता बेहद कमजोर और संदेहास्पद थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने कमजोर साक्ष्य के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अर्जुन जानी से कथित तौर पर प्रताड़ित कर जबरन अपराध स्वीकार कराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार प्राप्त कबूलनामा कानून की नजर में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जा सकता।

सर्वोच्च अदालत ने ओडिशा हाईकोर्ट के उस फैसले पर भी चिंता व्यक्त की, जिसमें अर्जुन जानी की जेल अपील को 3,157 दिनों की देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि जेल से आने वाली अपीलों के मामलों में न्यायालयों को संवेदनशील, व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि तकनीकी आधार पर किसी को न्याय से वंचित न होना पड़े।

करीब 22 वर्ष जेल में बिताने के बाद बरी हुए अर्जुन जानी के पुनर्वास को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए। अदालत ने कोरापुट (ओडिशा) के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और जिला कलेक्टर को तत्काल उनके पुनर्वास, आवास और आवश्यक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

इस फैसले को न्यायिक जवाबदेही, निष्पक्ष सुनवाई और निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।