पाँच माह से वेतन नहीं मिलने पर फूटा संस्कृत शिक्षकों का आक्रोश, दरभंगा में निकाला मौन जुलूस,

करीब लगभग 150 शिक्षक व कर्मचारियों ने डीएम और डीईओ को सौंपा सात सूत्री ज्ञापन, समय पर वेतन भुगतान समेत लंबित वित्तीय मांगों के शीघ्र समाधान की उठाई मांग

drbh दस्तक 7 मीडिया /

संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लंबित वेतन और अन्य मांगों को लेकर बुधवार को बिहार संस्कृत प्राथमिक सह माध्यमिक शिक्षक संघ, जिला इकाई दरभंगा के बैनर तले जिले के विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के करीब लगभग 150 शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने शहर में शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाला।

जुलूस के माध्यम से सरकार एवं प्रशासन का ध्यान वर्षों से लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए शीघ्र समाधान की मांग की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत मिथिला संस्कृत उच्च विद्यालय, दरभंगा परिसर में आयोजित सभा से हुई। सभा की अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष अमित कुमार दूबे ने की।

वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी पिछले कई महीनों से वेतन भुगतान नहीं होने के कारण गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। नियमित वेतन नहीं मिलने से परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा और अन्य आवश्यक घरेलू खर्चों का वहन करना कठिन हो गया है।

सभा के बाद जिलाध्यक्ष अमित कुमार दूबे एवं जिला सचिव समीर झा के नेतृत्व में शिक्षक एवं कर्मचारी हाथों में तख्तियां लेकर अनुशासित एवं शांतिपूर्ण मौन जुलूस के रूप में मिथिला संस्कृत उच्च विद्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। वहां प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को सात सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में विगत पाँच माह से लंबित वेतन का अविलंब भुगतान, भविष्य में प्रत्येक माह निर्धारित समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने, संस्कृत विद्यालयों से जुड़ी प्रशासनिक एवं वित्तीय समस्याओं का शीघ्र निराकरण, 1 अप्रैल 2013 से लंबित वेतन वृद्धि का भुगतान, एलपीए संख्या-43/2016 के न्यायादेश के आलोक में 1 मार्च 1989 से पंचम एवं 1 अप्रैल 2007 से षष्ठम वेतनमान के अंतर वेतन का भुगतान तथा शिक्षकों के लिए समान कार्य के बदले समान सुविधा बहाल करने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।

संघ के जिलाध्यक्ष अमित कुमार दूबे एवं जिला सचिव समीर झा ने कहा कि संस्कृत शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से लंबित मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की।
संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
वही इस अवसर पर एमएलसी डॉ मदन मोहन झा भी शिक्षकों के मार्च में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत संस्कृत शिक्षकों की लम्बित वेतन भुगतान करना चाहिए । मैं इनके मांगों के समर्थन में सड़क से सदन तक साथ हूँ ।
इस दौरान अनिल कुमार ईश्वर,वेदानंद मिश्र,दीनानाथ मिश्र ,आनंद झा,सुमन कुमार झा,मनीष कुमार,अजय कुमार ठाकुर,नीतीश कुमार,राजकुमार जी, अबिनीश चौधरी,सुभाष कुमार,लाल चौधरी, सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित थे।