अब रफ्तार पकड़ेगी सरकारी बहाली! बीएसएससी की कमान शोभा ओहतकर के हाथ, अभ्यर्थियों की बढ़ीं उम्मीदें
अब रफ्तार पकड़ेगी सरकारी बहाली! बीएसएससी की कमान शोभा ओहतकर के हाथ, अभ्यर्थियों की बढ़ीं उम्मीदें
अब रफ्तार पकड़ेगी सरकारी बहाली! बीएसएससी की कमान शोभा ओहतकर के हाथ, अभ्यर्थियों की बढ़ीं उम्मीदें
दस्तक 7मीडिया /पटना
बिहार में सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) को स्थायी नेतृत्व देते हुए 1990 बैच की सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी शोभा ओहतकर को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। 30 जून 2026 को गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा के महानिदेशक (डीजी) पद से सेवानिवृत्त होने के बाद अब वे बीएसएससी की जिम्मेदारी संभालेंगी।
बीएसएससी राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में तृतीय श्रेणी समेत अनेक पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया संचालित करता है। पिछले कुछ वर्षों में कई भर्तियां लंबित रहने, परीक्षाओं में देरी और परिणामों के विलंब को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष देखा गया। ऐसे समय में स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति को आयोग के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
सख्त प्रशासनिक अधिकारी की रही पहचान
शोभा ओहतकर ने अपने 36 वर्ष से अधिक के पुलिस सेवा काल में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी सख्त कार्यशैली और अनुशासनप्रिय छवि के कारण उन्हें ‘हंटर वाली मैडम’ के नाम से भी पहचान मिली। उन्होंने बिहार पुलिस, गृह रक्षा वाहिनी और अग्निशमन सेवा में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
लंबित भर्तियों पर रहेगा सबसे बड़ा फोकस
नई अध्यक्ष के सामने आयोग की लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उनकी नियुक्ति के बाद परीक्षाओं के आयोजन, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन, परिणाम प्रकाशन और नियुक्ति अनुशंसा की प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही नई रिक्तियों के लिए भी जल्द विज्ञापन जारी होने की संभावना बढ़ी है।
पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती की उम्मीद
प्रशासनिक अनुभव और सख्त कार्यशैली के कारण यह माना जा रहा है कि शोभा ओहतकर आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने पर जोर देंगी। इससे भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब कम हो सकता है और युवाओं का आयोग पर भरोसा भी मजबूत होगा।
लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें अब बीएसएससी पर
नई नियुक्ति के बाद अब राज्य के लाखों प्रतियोगी छात्रों की नजर बीएसएससी के आगामी फैसलों पर है। यदि लंबित भर्तियों को गति मिलती है और नई नियुक्तियों का कैलेंडर समय पर जारी होता है, तो यह बिहार के युवाओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी। सरकार के इस फैसले को राज्य की भर्ती व्यवस्था को अधिक प्रभावी और गतिशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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