बिहार में सोशल मीडिया पर सख्ती: अब IG-DIG सीधे जारी करेंगे टेकडाउन नोटिस, भड़काऊ पोस्ट पर लगेगा गुंडा एक्ट। गृह विभाग का बड़ा प्रशासनिक फैसला, आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की प्रक्रिया होगी तेज; सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ी
बिहार में सोशल मीडिया पर सख्ती: अब IG-DIG सीधे जारी करेंगे टेकडाउन नोटिस, भड़काऊ पोस्ट पर लगेगा गुंडा एक्ट। गृह विभाग का बड़ा प्रशासनिक फैसला, आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की प्रक्रिया होगी तेज; सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ी
बिहार में सोशल मीडिया पर सख्ती: अब IG-DIG सीधे जारी करेंगे टेकडाउन नोटिस, भड़काऊ पोस्ट पर लगेगा गुंडा एक्ट।
गृह विभाग का बड़ा प्रशासनिक फैसला, आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की प्रक्रिया होगी तेज; सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ी
दस्तक 7मीडिया /पटना
बिहार सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक, भ्रामक तथा सांप्रदायिक सामग्री के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। गृह विभाग ने राज्य के सभी 12 पुलिस रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को सीधे सोशल मीडिया कंपनियों को टेकडाउन नोटिस जारी करने का अधिकार प्रदान कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य आपत्तिजनक सामग्री को हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
नई व्यवस्था के तहत पहले जहां यह अधिकार केवल साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) के डीआईजी के पास था, वहीं अब संबंधित जोन के आईजी-डीआईजी, रेल आईजी और आईजी (कार्मिक) भी अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई कर सकेंगे। ये अधिकारी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को सीधे नोटिस भेजकर विवादित पोस्ट हटाने का निर्देश दे सकेंगे।
गृह विभाग ने इस व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह भी तय किया है कि जोनल अधिकारियों द्वारा की गई प्रत्येक कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य के आईटी सचिव को भेजी जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया की निगरानी और समीक्षा की जा सके।
इधर, बिहार अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा, गाली-गलौज, अफवाह फैलाने अथवा सामाजिक एवं सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट करने वालों के खिलाफ अब सीधे गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। दोषी पाए जाने पर छह माह से एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने जिलाधिकारियों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई, निगरानी और आवश्यक कानूनी कदम उठाने के विशेष अधिकार दिए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या तनावपूर्ण स्थिति को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।
नई व्यवस्था में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ा दी गई है। यदि किसी प्लेटफॉर्म को सरकारी टेकडाउन नोटिस मिलने के बाद भी आपत्तिजनक सामग्री समय पर नहीं हटाई जाती है, तो संबंधित कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा खो सकती है। ऐसी स्थिति में कंपनी के खिलाफ भी विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकेगी।