बिहार में वाहन चेकिंग के नियम बदले, अब सिपाही-जमादार नहीं रोकेंगे गाड़ियां,

पुलिस मुख्यालय का बड़ा आदेश: केवल दारोगा या उससे ऊपर के अधिकारी ही करेंगे जांच और चालान, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

बिहार पुलिस मुख्यालय ने यातायात व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। नए आदेश के तहत अब सिपाही और सहायक अवर निरीक्षक (जमादार/एएसआई) को वाहन रोककर जांच करने, दस्तावेजों की पड़ताल करने अथवा चालान काटने का अधिकार नहीं होगा। यह अधिकार केवल दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) और उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों को दिया गया है।

बिहार पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) सुधांशु कुमार द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि दारोगा से नीचे के किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा वाहन चेकिंग किए जाने पर इसे आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित कर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अब क्या होगी नई व्यवस्था

नए आदेश के अनुसार सिपाही और जमादार की जिम्मेदारी केवल सड़क पर यातायात को सुचारू बनाए रखना, जाम हटाना और यातायात संचालन तक सीमित रहेगी। वे किसी भी वाहन को रोककर उसके कागजात की जांच नहीं करेंगे और न ही किसी प्रकार का जुर्माना या चालान काट सकेंगे।

यदि किसी वाहन द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसे रोकने, जांच करने, वाहन जब्त करने अथवा चालान की कार्रवाई केवल सब-इंस्पेक्टर (एसआई) या उससे वरिष्ठ अधिकारी ही करेंगे।

शिकायतों के बाद लिया गया फैसला

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पिछले कुछ समय से वाहन जांच के दौरान अवैध वसूली, अभद्र व्यवहार और अनियमित कार्रवाई की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि वाहन जांच की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बने और आम लोगों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो।

उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और यातायात इकाइयों को निर्देश दिया है कि नए आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। यदि कोई सिपाही या जमादार वाहन जांच करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जनता को होगा फायदा

इस नई व्यवस्था से वाहन चालकों को अनावश्यक रोक-टोक और कथित अवैध वसूली जैसी शिकायतों से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही वाहन जांच की जवाबदेही तय होने से यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ेगा।