पुराने स्टाईल में लौट आई जोनल पुलिसिंग व्यवस्था, अब 4 जोन से होगी पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था की निगरानी,क्षेत्र को प्रक्षेत्र बनाने से पुलिसिया कार्यशैली होगी ओर भी बेहतर। मुख्यालय का बोझ घटेगा, जिलों पर बढ़ेगी जवाबदेही, अपराध नियंत्रण और पुलिस समन्वय को मिलेगी नई धार
पुराने स्टाईल में लौट आई जोनल पुलिसिंग व्यवस्था, अब 4 जोन से होगी पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था की निगरानी,क्षेत्र को प्रक्षेत्र बनाने से पुलिसिया कार्यशैली होगी ओर भी बेहतर। मुख्यालय का बोझ घटेगा, जिलों पर बढ़ेगी जवाबदेही, अपराध नियंत्रण और पुलिस समन्वय को मिलेगी नई धार
पुराने स्टाईल में लौट आई जोनल पुलिसिंग व्यवस्था, अब 4 जोन से होगी पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था की निगरानी,क्षेत्र को प्रक्षेत्र बनाने से पुलिसिया कार्यशैली होगी ओर भी बेहतर।
मुख्यालय का बोझ घटेगा, जिलों पर बढ़ेगी जवाबदेही, अपराध नियंत्रण और पुलिस समन्वय को मिलेगी नई धार
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
बिहार में कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह विभाग ने 29 जुलाई 2026 को जारी संकल्प के माध्यम से राज्य में सात वर्ष पूर्व समाप्त की गई जोनल पुलिसिंग व्यवस्था को पुनः लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत पूरे बिहार को फिर से चार पुलिस जोन में विभाजित किया गया है, जबकि प्रत्येक जोन के अधीन तीन-तीन पुलिस रेंज कार्य करेंगी। इस प्रकार राज्य में कुल 12 पुलिस रेंज पूर्ववत संचालित होंगी।
वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने जोनल व्यवस्था समाप्त कर सीधे 12 रेंज की प्रणाली लागू की थी। अब अपराध नियंत्रण, प्रशासनिक निगरानी और विभिन्न जिलों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुरानी व्यवस्था की वापसी की गई है।
चार जोन में बंटा पूरा बिहार
नई व्यवस्था के अनुसार राज्य को पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर इन चार पुलिस जोन में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) करेंगे, जबकि उनके अधीन आने वाली तीन-तीन रेंज की कमान पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के हाथों में होगी।
कौन कौन से जिले प्रक्षेत्र में
पटना जोन के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्र पटना, मगध क्षेत्र और शाहाबाद क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसमें पटना, नालंदा, गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर जिले आएंगे।
मुजफ्फरपुर जोन में तिरहुत, चंपारण और सारण रेंज शामिल रहेंगी। इसके अंतर्गत मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, बगहा, सारण, सिवान और गोपालगंज जिले होंगे।
दरभंगा जोन में मिथिला, कोशी और पूर्णिया रेंज को रखा गया है। इसमें दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले शामिल होंगे।
भागलपुर जोन के अंतर्गत पूर्वी, मुंगेर और बेगूसराय रेंज रहेंगी। इसमें भागलपुर, बांका, नवगछिया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय और खगड़िया जिले शामिल किए गए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेल पुलिस (जीआरपी) को इस व्यवस्था से अलग रखते हुए स्वतंत्र इकाई के रूप में ही संचालित किया जाएगा।
क्यों जरूरी समझी गई जोनल व्यवस्था?
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से पुलिस प्रशासन में द्विस्तरीय निगरानी प्रणाली लागू होगी। अब रेंज स्तर पर डीआईजी सीधे जिलों और थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे, जबकि जोन के आईजी पूरे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रदर्शन पर व्यापक नजर रखेंगे।
इसके साथ ही बिहार पुलिस मुख्यालय का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। पहले मुख्यालय को सभी 12 रेंज से सीधे समन्वय करना पड़ता था, जबकि अब केवल चार जोन के आईजी के माध्यम से सूचनाएं और रिपोर्ट प्राप्त होंगी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
त्योहार, चुनाव और बड़े आयोजनों में मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था से विभिन्न जिलों के बीच पुलिस बल की तैनाती, संसाधनों का आदान-प्रदान और समन्वय पहले की तुलना में अधिक आसान होगा। त्योहारों, चुनावों, वीआईपी दौरे या किसी बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती के दौरान जोन स्तर पर पुलिस बल का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे त्वरित कार्रवाई और प्रभावी नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी।
जमीनी पुलिसिंग होगी और मजबूत
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जोनल पुलिसिंग की वापसी से जिलों की नियमित मॉनिटरिंग बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और अपराध नियंत्रण की रणनीति अधिक संगठित तरीके से लागू की जा सकेगी। साथ ही पुलिस मुख्यालय से लेकर थाना स्तर तक प्रशासनिक श्रृंखला अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।
कुल मिलाकर, सात वर्षों बाद जोनल पुलिसिंग व्यवस्था की वापसी को बिहार पुलिस प्रशासन में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा आम लोगों को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और प्रभावी पुलिस व्यवस्था का लाभ मिलेगा।