सामुदायिक मध्यस्थता से सुलझेंगे गांव के विवाद, अरैला को मुकदमा मुक्त बनाने की पहल

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

गांवों में आपसी विवादों का समाधान अदालत के बजाय बातचीत और आपसी सहमति से कराने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने पहल तेज कर दी है। इसी कड़ी में हनुमाननगर प्रखंड के अरैला पंचायत सरकार भवन में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता के महत्व से अवगत कराया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अजय कुमार शर्मा के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता एक स्वैच्छिक, गोपनीय और प्रभावी विवाद समाधान प्रक्रिया है। इसमें समुदाय के प्रशिक्षित एवं निष्पक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों को आपसी संवाद के माध्यम से विवाद समाप्त करने और समझौते का रास्ता निकालने में सहयोग करते हैं।

उन्होंने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता न केवल अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को भी मजबूत बनाती है। अरैला पंचायत को मुकदमा मुक्त बनाने के उद्देश्य से लोगों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

इस दौरान सचिव ने आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील की।

कार्यक्रम में प्रशिक्षित मध्यस्थ अनील कुमार, अनीता आनंद एवं जाकीर हुसैन, अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, मुखिया लाल बाबू पासवान, सरपंच लखन बैठा, मोरो थानाध्यक्ष दिव्य ज्योति, सामुदायिक मध्यस्थ बिन्देश्वर राय, मनोहर कांत मिश्र एवं ज्योति कुमारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।