दरभंगा: बिरौल के स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा गार्ड की नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप, अस्पताल के प्रधान लिपिक पर साठगांठ का दावा
दरभंगा: बिरौल के स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा गार्ड की नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप, अस्पताल के प्रधान लिपिक पर साठगांठ का दावा
दरभंगा: बिरौल के स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षा गार्ड की नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप, अस्पताल के प्रधान लिपिक पर साठगांठ का दावा
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
बिरौल स्वास्थ्य केंद्र में पिछले लगभग पांच वर्षों से कार्यरत सुरक्षा गार्डों ने आउटसोर्सिंग एजेंसी बदलने के दौरान बहाली और नियुक्ति पत्र देने के नाम पर मोटी रकम वसूलने और ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में महावीर मुखिया, जितेंद्र पासवान, सुशील कुमार पासवान सहित कई पीड़ितों ने थाना प्रभारी, बिरौल को आवेदन देकर न्याय और कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
पीड़ितों के अनुसार, वे सभी बिरौल प्रखंड के स्थानीय निवासी हैं और पिछले पांच वर्षों से ‘इलाईट फ्लूकॉन’ कंपनी के माध्यम से बिरौल स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य कर रहे थे। हाल ही में पुरानी कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद ‘एवरेस्ट’ नामक नई कंपनी को सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा मिला। आवेदन में लगाए गए आरोपों के मुताबिक कमरे में बंद कर लिए गए कागजात और पैसे। नई कंपनी के नाम पर दो युवक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बिरौल की दूसरी मंजिल स्थित कमरा नंबर 38 में सुरक्षा गार्डों को बुलाकर अंदर से कमरा बंद कर लिया। वहां प्रति व्यक्ति 40,000 (चालीस हजार रुपये) और सभी कागजात (दस्तावेज़) यह कहकर जमा करा लिए गए कि शाम तक नियुक्ति पत्र दे दिया जाएगा। इस दौरान सभी का मोबाइल भी जमा करा लिया गया। जब पीड़ितों ने शाम को नियुक्ति पत्र की मांग की, तो उक्त युवकों ने साफ इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों युवक रुपयों से भरा बैग और कागजात लेकर कमरा नंबर (स्थापना लिपिक कक्ष) में चले गए। गार्डों का आरोप है कि लिपिक (अनुमंडल अस्पताल के प्रधान लिपिक सुशील मिश्रा) की मिलीभगत से कमरे को बाहर से ताला लगा दिया गया। आरोप है कि अंदर ही अंदर एकत्रित किए गए पैसों का बंटवारा किया गया। हंगामा होने पर जब रूम खोला गया, तो पीड़ितों में से एक जितेन्द्र पासवान (उम्र 32 वर्ष, पिता: श्री जीवछ पासवान) ने जब अपने पैसे वापस मांगे, तो उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की गई और बहाली न करने की धमकी दी गई। पीड़ितों ने बताया कि जब उन्होंने ठगी का अहसास होने पर पैसे तुरंत लौटाने की बात कही, तो अनुमंडल अस्पताल बिरौल के प्रधान लिपिक सुशील मिश्रा ने दोनों युवकों को मौके से भगा दिया। पीड़ित सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी सेवा ईमानदारी से दे रहे हैं, लेकिन नई एजेंसी और स्थानीय अस्पताल प्रशासन की साठगांठ के कारण उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने थाना प्रभारी से मामले की निष्पक्ष जांच करने, उनके पैसे वापस कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदन प्राप्त होने के बाद इस मामले की जांच करने पीएसआई भार्गवी कुमारी अनुमंडल अस्पताल पहुंची। इस दौरान पुलिस पदाधिकारी ने अस्पताल के प्रधान लिपिक से पूछताछ की। थानाध्यक्ष चन्द्र मणि ने बताया कि इस मामले में जांच की जा रही है। वहीं अस्पताल के प्रधान लिपिक सुशील मिश्रा ने कहा कि उन पर लगाया गया आरोप निराधार है।