बिहार में नए नगर निकायों के गठन और क्षेत्र विस्तार का मार्ग प्रशस्त 31 मार्च 2027 के बाद नए सिरे से मांगे जाएंगे प्रस्ताव

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता,दरभंगा/पटना।

बिहार में तीव्र शहरीकरण और स्थानीय नागरिकों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नगर निकायों के गठन, उत्क्रमण और क्षेत्र विस्तार से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार द्वारा जारी पत्रों के अनुसार, राज्य में भारत की जनगणना-2027 का कार्य पूर्ण होने के पश्चात ही नए प्रस्तावों पर विधिवत कार्रवाई संभव होगी।
1.प्रशासनिक सीमाओं के परिवर्तन पर रोक–राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना (संख्या 514(4) दिनांक 28 जुलाई 2025) के तहत जनगणना अधिनियम,1948 के नियमों के अंतर्गत यह आदेशित किया गया है कि जनगणना-2027 के सुचारू संचालन के लिए राज्य के सभी जिलों, अनुमंडलों, प्रखण्डों, सांविधिक शहरों, ग्राम पंचायतों और गांवों के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार की सीमाओं में 31 दिसंबर 2025 के पश्चात से जनगणना कार्य पूर्ण होने की तिथि यानी 31 मार्च 2027 तक किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
2.पूर्व के 29 प्रस्ताव फिलहाल स्थगित–
इस वैधानिक बाध्यता के चलते, विभिन्न जिलों से पूर्व में प्राप्त कुल 29 प्रस्तावों (सारण, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, रोहतास, मधुबनी, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण जिलों से संबंधित) पर जनगणना-2027 की प्रक्रिया पूरी होने तक अग्रेतर कार्रवाई रोक दी गई है। जनगणना पूर्ण होने के बाद नवीनतम आंकड़ों के आधार पर नए सिरे से प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
3.नगर निकाय गठन एवं उत्क्रमण के मानक (बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के तहत)–
वृहतर शहरी क्षेत्र (नगर निगम) 2 लाख या उससे अधिक जनसंख्या।
मध्यम शहरी क्षेत्र (नगर परिषद) 40,000 से अधिक किंतु 2 लाख से कम जनसंख्या।
अन्तर्वर्ती क्षेत्र (नगर पंचायत) 12,000 से अधिक किंतु 40,000 से कम जनसंख्या (पहाड़ी/पर्यटन/तीर्थ स्थलों के लिए 9,000 से 30,000 तक)।
सभी दशाओं में दीर्घकालिक व अल्पकालिक काश्तकार कर्मियों (कृषि कर्मियों) की कुल जनसंख्या, उस क्षेत्र के कुल कर्मियों की संख्या के 50% से कम होनी चाहिए।
4.छोटे-छोटे बाजारों और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों को नगर निकायों के रूप में अधिसूचित किए जाने से उन क्षेत्रों में साफ-सफाई, समुचित ड्रेनेज, जलापूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (कचरा संग्रहण), और स्ट्रीट लाइट जैसी आधुनिक शहरी सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी। साथ ही, मास्टर प्लान के तहत सुनियोजित विकास संभव हो सकेगा।