26 साल से न्याय की तलाश में भटक रहा पूर्व नेवी जवान, अनुशंसित जमीन पर शुरू हुआ स्टेडियम निर्माण
26 साल से न्याय की तलाश में भटक रहा पूर्व नेवी जवान, अनुशंसित जमीन पर शुरू हुआ स्टेडियम निर्माण
26 साल से न्याय की तलाश में भटक रहा पूर्व नेवी जवान, अनुशंसित जमीन पर शुरू हुआ स्टेडियम निर्माण
दस्तक 7 मिडिया, घनश्यामपुर, दरभंगा।
देश की सेवा के बदले पुरस्कारस्वरूप मिली अनुशंसित जमीन पर अधिकार पाने के लिए एक सेवानिवृत्त नेवी जवान पिछले 26 वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। किरतपुर प्रखंड के झगरूवा गांव निवासी सहदेव राम का आरोप है कि वर्ष 1998 में सेना में उत्कृष्ट सेवा के सम्मान स्वरूप उन्हें 2 एकड़ 50 डिसमिल सरकारी जमीन देने की अनुशंसा की गई थी। तत्कालीन घनश्यामपुर अंचल कार्यालय ने उन्हें जमीन उपलब्ध कराई थी और वर्ष 2025 तक उस पर उनका कब्जा भी रहा। लेकिन बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अब उसी जमीन पर पंचायत की ओर से स्टेडियम का निर्माण शुरू करा दिया गया है।
सहदेव राम ने बताया कि जब उन्हें जमीन आवंटित की गई थी, तब घनश्यामपुर और किरतपुर एक ही अंचल के अंतर्गत आते थे। वर्ष 2003 में किरतपुर अलग अंचल बनने के बाद उनका मामला दोनों अंचलों के बीच उलझ गया। उनका आरोप है कि किरतपुर अंचल कार्यालय उन्हें घनश्यामपुर भेजता रहा, जबकि घनश्यामपुर अंचल कार्यालय मामला किरतपुर का बताकर वापस लौटा देता था। इसी कारण आज तक न तो जमीन की रसीद कटी और न ही बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी हो सकी। पूर्व सैनिक का कहना है कि वर्ष 2004 से अब तक वे अंचलाधिकारी, एसडीओ, डीसीएलआर, अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय बिरौल, जिला लोक शिकायत निवारण प्राधिकार, एडीएम, जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा तक अपनी शिकायत लेकर पहुंच चुके हैं। बावजूद इसके उन्हें न्याय नहीं मिला और इसी बीच उनकी अनुशंसित जमीन पर स्टेडियम निर्माण शुरू करा दिया गया। सहदेव राम के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान एडीएम ने किरतपुर अंचलाधिकारी को पुराने खाता संख्या-425 तथा पुराने खेसरा संख्या-2562 एवं 2563 के आधार पर अभिलेख तैयार कर बंदोबस्ती का पर्चा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अंचल स्तर पर आदेश का पालन नहीं किया गया और मामले को लगातार लंबित रखा गया।
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर वर्षों तक समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। उनका कहना है कि देश की सेवा करने के बाद भी उन्हें अपने अधिकार के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है।
किरतपुर के अंचलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि एडीएम की अध्यक्षता में गठित संयुक्त जांच दल, जिसमें किरतपुर के अंचलाधिकारी, डीसीएलआर बिरौल और अनुमंडल पदाधिकारी बिरौल शामिल थे, की जांच में यह सामने आया कि संबंधित जमीन की बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी और न ही परवाना निर्गत किया गया था। उन्होंने बताया कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुरूप की जाएगी।