दरभंगा /संजय कुमार राय

आईजी ऑफिस मे हो रहें बड़े खेल से पूरा महकमा बदनाम हो रहा हैं ,समय रहते हुये इसपर लगाम नहीं लगाया गया तो लोंगों का भरोसा पुलिसिया सिस्टम से उठ जाएगा ?जी हाँ हम बात कर रहें हैं पुलिस मुख्यालय से आयें उस पत्र का ,जिस पत्र मे एएसआई संजीव झा पर कई आरोप लगाये गये हैं।
बिहार पुलिस मुख्यालय का एक पत्र मिथिला प्रक्षेत्र के आईजी को मिला हैं , जिस पत्र मे एएसआई संजीव झा पर कई आरोप लगाते हुये जांच दिया गया हैं। स्वाभाविक हैं जांच प्रतिवेदन पुलिस मुख्यालय को देर सबेर भेजा जाएगा। इस पूरे प्रकरण को गौर से समझने का प्रयास करेंगे तो बहूत बड़ा झोल हैं ?
जो आवेदन बिहार पुलिस मुख्यालय को भेजा गया हैं उसमें शिकायत कर्ता का नाम नहीं हैं ,हाँ जिसने स्पीड पोस्ट किया हैं उसका नाम जरूर हैं।
कई थानाध्यक्ष दबे जुबान से यह स्वीकार करते हैं कि आईजी ऑफिस के कर्मियों द्वारा उन्हें भयादोहन कर जबरन पैसे की मांग की जाती हैं ?लेकिन जब जांच की बात होगी तो शायद ही कोई थानाध्यक्ष यह स्वीकार करेगा कि उनके साथ भय दिखाकर पैसों की वसूली की गई हैं।
बिहार पुलिस मुख्यालय के द्वारा जांच मे आयें इस पत्र के बाद ऐसा लग रहा हैं कि आईजी के कार्यालय मे गुटबाजी और वर्चस्व को लेकर आरोप प्रत्यारोप जारी हैं। यह आरोप प्रत्यारोप जाहिर सी बात हैं कि अवैध उगाही को लेकर हैं। ऐसे मे पूरे व्यवस्था पर प्रश्न उठना लाजमी हैं ?दरअसल इन कार्यालयों मे कई वर्षों से पुलिसकर्मी जमे हैं और ये अपना रसूख बनाकर रखना चाहते हैं इस कारण आईजी ऑफिस की स्थिति बहूत खराब हैं।
पुलिस मुख्यालय ने वर्षों से जमे कर्मियों को बार बार बिरमित करने का निर्देश दिया ,बावजूद इसके आज के दिनों मे भी कई ऐसे पुलिस कर्मी हैं जो वर्षों से जमे हैं।
इस कारण वर्चस्व की लड़ाई स्वाभाविक हैं।
सूत्रों की माने तो हाल के दिनों मे कई थानाध्यक्षों को आई जी ऑफिस के कर्मियों द्वारा भय दिखाकर अवैद्य रूप से उगाही की गई हैं ,इसमें तीनों जिला के कई थानाध्यक्ष हैं ?सूत्रों का कहना हैं कि हाल के दिनों मे फुलपरास ,घोघरडीहा आदि थानाध्यक्षों से मोटी रकम की वसूली हुई हैं और भी पैसों के लिये दबाव बनाया जा रहा हैं ,चर्चा मे यह बातें हैं। अगर यही बात इन थानाध्यक्षों से पूछा जाय तो इनकी क्या मजाल जो आईजी के खिलाफ या उनके कर्मियों के खिलाफ बोल दे ,ऐसे मे एक बात तो यह तय हैं कि एएसआई संजीव झा के विरुद्ध जो जांच मे आवेदन आयें हैं ,वह किसी ना किसी रूप मे जांच का विषय हैं ?क्यूंकि यह फेंक आवेदन कोई पीड़ित ही दिया होगा।
हालांकि इस आरोप -प्रत्यारोप के मामले मे एक बात तो सही हैं कि आईजी ऑफिस मे हो रही गुटबाजी से पूरा महकमा बदनाम हो रहा हैं। अगर आई जी कार्यालय का कोई कर्मी किसी थानेदार से पैसा उगाही कर रहा हैं तो सवाल यही हैं कि  आईजी ऑफिस का कर्मी क्या अपने मन से यह उगाही कर रहा होगा ?उसकी इतनी मजाल शायद नहीं हो सकता। अगर यह उगाही नहीं हो रहा हैं तो यह आरोप भले ही फेंक हो कोई कैसे लगा सकता हैं ?अब आईजी द्वारा जांच के बाद ही मामले से पर्दा हट सकता हैं और पूरी कारवाई के बाद ही आईजी कार्यालय का स्थिति बेहतर हो सकता हैं और बेहतर तभी होगा जब वर्षों से जमे कर्मियों को कहीं अन्यत्र भेज दिया जाय।