सरकार के ऐतिहासिक निर्णय से परीक्षा प्रणाली में बढ़ेगी पारदर्शिता-आरके जायसवाल
सरकार के ऐतिहासिक निर्णय से परीक्षा प्रणाली में बढ़ेगी पारदर्शिता-आरके जायसवाल
सरकार के ऐतिहासिक निर्णय से परीक्षा प्रणाली में बढ़ेगी पारदर्शिता-आरके जायसवाल
दस्तक 7 मिडिया, दरभंगा।
सरकार द्वारा नीट परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच लिए गए ऐतिहासिक निर्णय का समाजसेवी एवं अभियंता आर. के. जायसवाल ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने देश विरोधी ताकतों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है तथा राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत किया है।
जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर सरकार के निर्णायक कदम देश की एकता, अखंडता और विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सहयोग एवं जागरूकता बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि सरकारी एवं प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। धांधली और लापरवाही के आरोपों के चलते नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को सेवा से हटाया गया है। साथ ही, नकल विरोधी कानून पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसमें भारी जुर्माने और कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। पेपर लीक जैसे मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की भी घोषणा की गई है।
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केंद्र सरकार और एनटीए से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली की दिशा में प्रगति तथा डेटा सुरक्षा के ठोस ब्लूप्रिंट पर भी जानकारी मांगी गई है। समाज सेवी श्री जायसवाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र छात्रों के प्रति नैतिक जवाबदेही और उच्च लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचायक है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही की भावना को मजबूत करने वाला कदम बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे विषय को विपक्षी दलों द्वारा राजनीतिक लाभ-हानि से जोड़ने तथा अनावश्यक राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया, जिससे देश के युवाओं एवं छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।