नीट पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को सीबीआई की क्लीन चिट, आरजेडी का केंद्र पर तीखा हमला,

सुधाकर सिंह बोले– सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए अदालतों का सहारा ले रही, सीबीआई ने कहा- लीक में संजीव मुखिया के खिलाफ नहीं मिले ठोस सबूत

दस्तक 7मीडिया /पटना

नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले के कथित मुख्य आरोपी संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं सीबीआई का कहना है कि व्यापक जांच के बावजूद संजीव मुखिया के खिलाफ प्रश्नपत्र चोरी, लीक करने अथवा बांटने से जुड़ा कोई ठोस डिजिटल या भौतिक साक्ष्य नहीं मिला।

आरजेडी के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें पेपर लीक के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामी की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय अदालतों के कंधों पर डाल रही है। उनका आरोप है कि असली दोषियों को बचाने के बाद अब सरकार न्यायपालिका का सहारा लेकर अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।

आरजेडी ने एक बार फिर संजीव मुखिया के कथित राजनीतिक संबंधों का मुद्दा उठाया। पार्टी का दावा है कि उसकी पत्नी ममता देवी का सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़ाव रहा है और इसी प्रभाव के कारण उसे बचाने की कोशिश की गई। हालांकि जदयू पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार बता चुकी है।

सीबीआई ने पटना की विशेष अदालत में दाखिल अपने पक्ष में कहा कि जांच के दौरान संजीव मुखिया के खिलाफ ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि उसने नीट-यूजी 2024 का प्रश्नपत्र चुराया, लीक किया या अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। एजेंसी के अनुसार केवल पुराने मामलों में नाम आने या संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

जांच एजेंसी ने इस बहुचर्चित मामले में अब तक 45 आरोपियों के खिलाफ कई आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इन आरोपपत्रों में पेपर लीक की पूरी साजिश, धन के लेन-देन और विभिन्न आरोपियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में संजीव मुखिया का नाम शामिल नहीं किया गया।

हालांकि नीट-यूजी मामले में राहत मिलने के बावजूद संजीव मुखिया फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएगा। वह बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई द्वारा जांच किए जा रहे सिपाही भर्ती परीक्षा और बिहार लोक सेवा आयोग की शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-3) सहित अन्य कथित पेपर लीक मामलों में न्यायिक हिरासत में बंद है।

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की इस कार्रवाई ने एक बार फिर जांच प्रक्रिया, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।