सोशल मीडिया की चमक से बचें, अदालत में बनाएं पहचान: सीजेआई सूर्यकांत

दस्तक 7मीडिया /नई दिल्ली

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने युवा वकीलों को सोशल मीडिया की लोकप्रियता और त्वरित पहचान की दौड़ से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि किसी भी अधिवक्ता की असली प्रतिष्ठा अदालत में उसके काम, तैयारी और आचरण से बनती है, न कि इंटरनेट पर मिलने वाले लाइक्स, व्यूज और टिप्पणियों से।

22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकीलों को अपनी सफलता का आकलन सोशल मीडिया की लोकप्रियता से नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को ऐसे काम नहीं करना चाहिए जैसे कोई टीवी चैनल हर समय केवल अपनी दर्शक संख्या बढ़ाने की चिंता में लगा रहता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई देना आसान है, लेकिन केवल दिखावा किसी व्यक्ति को विश्वसनीय नहीं बनाता। एक सफल वकील की पहचान उसकी कानूनी समझ, मुकदमे की तैयारी, प्रभावी ड्राफ्टिंग और अदालत में मर्यादित आचरण से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानूनी पेशे में लंबे समय तक सम्मान वही पाता है, जो वर्षों तक गंभीरता और ईमानदारी से मेहनत करता है।

मुख्य न्यायाधीश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर भी संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एआई कुछ ही क्षणों में आकर्षक कानूनी मसौदा तैयार कर सकता है, लेकिन किसी मुकदमे की परिस्थितियों, भावनाओं और मानवीय पक्ष को केवल एक इंसान ही सही ढंग से समझ सकता है। उन्होंने कहा कि मुवक्किल किसी मशीन पर नहीं, बल्कि अपने वकील की समझ, अनुभव और संवेदनशीलता पर भरोसा करता है।

अपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने युवा अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे डिजिटल दुनिया की क्षणिक प्रसिद्धि के बजाय अपनी ऊर्जा न्यायालय में उत्कृष्ट कार्य, नैतिकता और पेशेवर विश्वसनीयता विकसित करने में लगाएं। उनका कहना था कि यही गुण एक वकील को लंबे समय तक सम्मान और सफलता दिलाते हैं।