देशभर के रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को मिलेंगी समान सुविधाएं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दो हफ्ते में समिति बनाने का दिया आदेश

दस्तक 7मीडिया /नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को मिलने वाली सेवानिवृत्ति सुविधाओं में एकरूपता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करे, जो पूरे देश में रिटायर्ड जजों के लिए समान सुविधाओं की नीति तैयार करेगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल थे, ने 20 जुलाई 2026 को यह आदेश सुनाया। अदालत ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में भारी असमानता है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है।

तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि गठित समिति तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें और विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। समिति यह भी तय करेगी कि इन सुविधाओं पर आने वाले खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकारें किस अनुपात में करेंगी।

इन सुविधाओं को किया जाएगा एक समान

अदालत ने जिन प्रमुख सुविधाओं को पूरे देश में समान रूप से लागू करने की आवश्यकता बताई, उनमें शामिल हैं-सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए समान सुरक्षा व्यवस्था,ड्राइवर और घरेलू सहायक की सुविधा,सरकारी गेस्ट हाउस या आवास की व्यवस्था, चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रीइम्बर्समेंट) की समान व्यवस्था, टेलीफोन एवं अन्य आवश्यक संचार सुविधाएं।

सीजेआई की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि “वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना हमारी संस्कृति का भी हिस्सा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी राज्य में रिटायर्ड न्यायाधीशों के साथ सुविधाओं के मामले में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

पीठ ने कुछ राज्यों में सचिवीय सहायता और सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए मात्र 15 हजार रुपये दिए जाने पर भी चिंता जताई और कहा कि ऐसी व्यवस्था न्यायपालिका की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

अवमानना याचिका पर हुई सुनवाई

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों के एसोसिएशन के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी.एस. दवे द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट तीन महीने बाद समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई करेगा।