उपेक्षा का दंश, देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले बिरौल के स्वतंत्रता सेनानी आज विस्मृति के अंधेरे में

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता दरभंगा।


देश की आजादी के लिए अपनी जवानी, अपना परिवार और अपना सब कुछ दांव पर लगाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को आज हमारा समाज धीरे-धीरे भूलता जा रहा है। एक तरफ जहां पद पर बैठे माननीय लोगों के जन्मदिन पर आयोजनों की धूम रहती है, वहीं दूसरी ओर बिरौल अनुमंडल की मिट्टी से जुड़े उन अमर सेनानियों की जयंती तक याद नहीं की जाती, जिनकी बदौलत आज हम खुली हवा में सांस ले रहे है।
बिरौल प्रखंड के पुराने परिसर में स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में एक शिलापट स्थापित है। विडंबना यह है कि राष्ट्रीय पर्वों जैसे स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब नेता मंच से राष्ट्रभक्ति का संबोधन करते हैं, तो उस समय इन वीर सेनानियों का नाम तक लेना उचित नहीं समझते। उस शिलापट पर एक अदद पुष्प अर्पित करना तो दूर, जनप्रतिनिधियों ने उन्हें लगभग भुला ही दिया है।
बिरौल अनुमंडल क्षेत्र के इतिहास में दर्ज कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना अमूल्य योगदान दिया था, लेकिन आज वे स्थानीय उपेक्षा के शिकार हैं। विंदेश्वरी सिंह, राजेन्द्र नारायण सिंह,
बासुदेव सहनी, ठक्को धोवी,सतन धोवी,बुधनी धोवी,
शोभा कांत झा,महावीर साहु,मुक्ति महतो,देवनारायण सिंह, प्रताप नारायण सिंह,बाबु नारायण सिंह, रामचंद्र आचार्य,बच्ची देवी, रामचंद्र झा,माया देवी,ललित मोहन झा,जसिया,राम ज्योति देवी सहित कई स्वतंत्रता सेनानी का ये केवल नाम नहीं, बल्कि उस संघर्ष की गाथा हैं जिसने भारत माता की बेड़ियों को तोड़ा था। क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इन सेनानियों का सम्मान करना हमारा नैतिक कर्तव्य है, न कि केवल औपचारिकता।
स्थानीय लोगों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति हमारा व्यवहार ऐसा उदासीन होगा, तो नई पीढ़ी को देश प्रेम की प्रेरणा कैसे मिलेगी? क्या हमारे वीर सेनानी केवल एक शिलापट तक सीमित रह गए हैं?
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि
1. स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मुख्य कार्यक्रमों में इन महान सेनानियों का स्मरण किया जाए।
2. बिरौल प्रखंड के पुराने परिसर स्थित शिलापट का जीर्णोद्धार हो और वहां नियमित रूप से माल्यार्पण की व्यवस्था हो।
3. इनकी जयंती पर सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि आने वाली पीढ़ी को उनके बलिदान से प्रेरणा मिल सके।
आजादी की लौ जलाने वाले इन सेनानियों को विस्मृत करना उस महान इतिहास के साथ अन्याय है। वक्त आ गया है कि प्रशासन अपनी संवेदनहीनता को त्यागे और उन वीर सपूतों को वह सम्मान दे, जिसके वे हकदार हैं। बीडीओ प्रदीप कुमार झा ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि इस परिसर के जिनोद्धार के लिए पीओ को स्थल जांच करने को कहा गया है।