बिरौल के सुता पट्टी बाजार में ‘मौत का साया, खूनी इतिहास समेटे जर्जर भवन और विशाल बरगद बन रहे राहगीरों के लिए खतरा
बिरौल के सुता पट्टी बाजार में ‘मौत का साया, खूनी इतिहास समेटे जर्जर भवन और विशाल बरगद बन रहे राहगीरों के लिए खतरा
बिरौल के सुता पट्टी बाजार में ‘मौत का साया, खूनी इतिहास समेटे जर्जर भवन और विशाल बरगद बन रहे राहगीरों के लिए खतरा
दस्तक 7 मिडिया से, उत्तम सेनगुप्ता का विशेष रिपोर्ट
दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत सुता पट्टी बाजार का व्यस्त मार्ग इन दिनों किसी अनहोनी की आहट से सहमा हुआ है। यह वही स्थान है, जहां वर्षों पहले हुई तिहरी हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को दहला कर रख दिया था। स्वर्गीय उदय शंकर साह का यह भवन, जो कभी चहल-पहल का केंद्र हुआ करता था, आज एक खौफनाक वीरानगी और मौत के खतरे में तब्दील हो चुका है।
वर्षों पूर्व, संपत्ति विवाद ने इस भवन को रक्त रंजित कर दिया था। इस नृशंस घटना में उदय प्रसाद, उनकी माता और एक स्थानीय व्यापारी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से ही यह भवन शापित मानकर छोड़ दिया गया। तब से लेकर आज तक यह इमारत न केवल खाली पड़ी है, बल्कि धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रही है।
घटना के कुछ माह बाद ही, इस खंडहरनुमा भवन की दीवारों के बीच से एक नन्हा बरगद का पौधा उग आया था। समय के साथ वह पौधा अब एक विशालकाय वृक्ष का रूप ले चुका है। बरगद की जड़ें अब इमारत की नीव को खोखला कर रही हैं। यह विशाल वृक्ष न केवल जर्जर भवन पर भारी पड़ रहा है, बल्कि इसकी लटकती डालियां और कमजोर हो चुकी टहनियां व्यस्त सड़क पर गुजरने वाले राहगीरों के सिर पर हर पल ‘मौत बनकर’ लटक रही हैं।
सुता पट्टी बाजार का यह मार्ग अत्यंत व्यस्त है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों लोग कपड़े की खरीदारी करने, स्कूली बच्चों, बैंक, पोस्ट ऑफिस और छोटे-बड़े वाहनों का गुजरना होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस खतरे को लेकर कई बार दबी जुबान में चिंता जता चुके हैं, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
नगर पंचायत प्रशासन ने इस खतरनाक भवन और वृक्ष के जोखिम का आकलन किया है और न ही किसी प्रकार की बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाने की जहमत उठाई है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का स्पष्ट मानना है कि प्रशासन के त्वरित हस्तक्षेप के बिना इस विशाल पेड़ को हटाना असंभव है। यह एक घनी आबादी वाला इलाका है, जहां थोड़ी सी भी चूक किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन समय रहते अविलंब इस भवन और वृक्ष का तकनीकी निरीक्षण करे और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इसे हटवाए, ताकि राहगीर सुरक्षित महसूस कर सकें।