अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 4 अगस्त को पटना समेत 5 राज्यों के नगर निकायों के अफसर तलब,

कहा- सिर्फ बिल्डरों पर कार्रवाई नहीं, लापरवाह अधिकारियों की भी होगी जवाबदेही; सीलिंग और ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट मांगी

दस्तक 7मीडिया ,नई दिल्ली

देशभर में अवैध और असुरक्षित निर्माण के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निकायों के शीर्ष अधिकारियों को 4 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही अवैध इमारतों को सील करने और ध्वस्त करने के लिए अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि 4 अगस्त तक जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखी तो संबंधित नगर निगम या विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की जवाबदेही तय की जाएगी।

अदालत ने एमिकस क्यूरी की उस दलील से भी सहमति जताई, जिसमें कहा गया कि हादसे होने के बाद प्रशासन केवल बिल्डरों की गिरफ्तारी कर औपचारिकता निभाता है, जबकि अवैध निर्माण रोकने में विफल अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब ऐसी कार्यशैली स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित निकायों को निर्देश दिया है कि वे अपनी रिपोर्ट में उन अधिकारियों के नाम भी दर्ज करें, जिनकी लापरवाही के कारण अवैध निर्माण नहीं रोका जा सका।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली के साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर क्षेत्रों का स्वतंत्र सर्वे कराने के लिए IIT दिल्ली के दो वरिष्ठ प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की विशेष टीम गठित करने का भी आदेश दिया।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली के साकेत में अवैध इमारत गिरने से छह लोगों की मौत, मालवीय नगर में आग और लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड जैसे मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि 20 मई को दिए गए सीलिंग और ध्वस्तीकरण संबंधी निर्देशों के बावजूद कई स्थानों पर केवल कागजी कार्रवाई हुई, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखी।सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को अवैध निर्माण के मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 4 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगेगी और आवश्यकता पड़ने पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय करेगी।