लापरवाही की पराकाष्ठा, खुला रहा मनरेगा कार्यालय, कुर्सियां रहीं खाली, दूर-दराज से आए ग्रामीण परेशान
लापरवाही की पराकाष्ठा, खुला रहा मनरेगा कार्यालय, कुर्सियां रहीं खाली, दूर-दराज से आए ग्रामीण परेशान
लापरवाही की पराकाष्ठा, खुला रहा मनरेगा कार्यालय, कुर्सियां रहीं खाली, दूर-दराज से आए ग्रामीण परेशान
दस्तक 7 मिडिया, घनश्यामपुर, दरभंगा।
सरकारी कार्यालयों में समय की पाबंदी और जवाबदेही के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। घनश्यामपुर प्रखंड स्थित मनरेगा कार्यालय में बुधवार दोपहर को प्रशासनिक उदासीनता का ऐसा नजारा दिखा, जहां कार्यालय का दरवाजा तो खुला था, लेकिन अंदर कुर्सियां खाली पड़ी थीं। अधिकारी और कर्मचारी नदारद थे, जबकि अपने कामों के लिए दफ्तर पहुंचे ग्रामीण घंटों इंतजार करते रहे।
बुधवार दोपहर करीब 1 बजे जब मिडिया की टीम ने मनरेगा कार्यालय का जायजा लिया, तो कार्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा था। मुख्य गेट और कमरों के दरवाजे खुले हुए थे, मेजों पर फाइलें और रजिस्टर बिखरे पड़े थे, लेकिन उन्हें संभालने वाला एक भी जिम्मेदार कर्मचारी वहां मौजूद नहीं था।
कार्यालय न होने की वजह से अपने दैनिक कार्यों—जैसे जॉब कार्ड, भुगतान की समस्या और योजनाओं की जानकारी लेने आए ग्रामीणों को भारी मायूसी हाथ लगी। ग्रामीणों ने बताया कि वे दूर-दराज के गांवों से अपना कीमती समय निकालकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन कार्यालय पहुंचने पर उन्हें अक्सर मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है। समय पर कर्मचारियों के न मिलने से न केवल सरकारी योजनाओं की गति धीमी हो रही है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी तंत्र से उठता जा रहा है। औकार्यालय में मौजूद एकमात्र कर्मी, डाटा ऑपरेटर शमसुल ने अपनी सफाई में कहा कि,”सभी कर्मचारी ‘जी राम जी’ योजना के संबंध में किसी कार्य से जिला मुख्यालय गए हुए हैं।
वहीं, जब इस मामले पर मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी अजहरउदीन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने पूरे मामले पर चुप्पी साध ली। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे। कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा, मैं इस स्थिति की पूरी जानकारी लूंगा। यदि कोई भी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति या पर्याप्त सूचना के अपने कार्यस्थल से गायब पाया गया, तो यह स्पष्ट रूप से विभागीय अनुशासनहीनता का मामला है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सवाल यह उठता है कि यदि पूरा स्टाफ किसी बैठक या सरकारी कार्य से बाहर था, तो कार्यालय का मुख्य गेट खुला क्यों छोड़ा गया? बिना किसी सूचना बोर्ड के दफ्तर को ‘राम भरोसे’ छोड़ देना न केवल सुरक्षा की दृष्टि से गलत है, बल्कि यह साबित करता है कि ब्लॉक मुख्यालय में कार्य संस्कृति का स्तर कितना गिर चुका है।अब देखना यह है कि कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन पर अमल होता है या यह मामला फाइलों के बीच ही दबकर रह जाएगा।
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