दरभंगा पुलिस में महिला कर्मियों के साथ अशोभनीय व्यवहार के बाद न्याय के इंतजार में और सवालों के घेरे में सिस्टम,आम लोगों के बीच इस कृत्य और पुलिस पदाधिकारियों के मौन को लेकर पूरे विभाग में चर्चा ?
दरभंगा पुलिस में महिला कर्मियों के साथ अशोभनीय व्यवहार के बाद न्याय के इंतजार में और सवालों के घेरे में सिस्टम,आम लोगों के बीच इस कृत्य और पुलिस पदाधिकारियों के मौन को लेकर पूरे विभाग में चर्चा ?
दरभंगा पुलिस में महिला कर्मियों के साथ अशोभनीय व्यवहार के बाद न्याय के इंतजार में और सवालों के घेरे में सिस्टम,आम लोगों के बीच इस कृत्य और पुलिस पदाधिकारियों के मौन को लेकर पूरे विभाग में चर्चा ?
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
एसएसपी कार्यालय के आईटी सेक्शन से सामने आई एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील घटना ने पुलिस महकमे के भीतर और बाहर हलचल मचा दी है। आई टी प्रोग्रामर के पद पर तैनात एक कर्मी द्वारा महिला पुलिस कर्मियों के साथ किए गए कथित अशोभनीय व्यवहार ने न केवल अनुशासन की धज्जियों उड़ाई हैं, बल्कि खाकी की गरिमा को भी गंभीर रूप से आहत किया है ,महीना भर पहले सामने आई इस वारदात के बाद भी मामले को जांच के नाम पर खींचना और मामले को रफा दफा करने की मंशा ने पूरे सिस्टम पर दाग छोड़ दिया हें।
पुलिस विभाग के कनीय पदाधिकारियों और आम जनता के बीच इस मुद्दे पर तीखी चर्चा और गहरा असंतोष व्याप्त है। नाम न छापने की शर्त पर कई पुलिसकर्मियों ने बताया कि कार्यालय के भीतर आई टी प्रोग्रामर कर्मी का महिला पुलिस कर्मियों के प्रति इस प्रकार का बर्ताव न केवल अशोभनीय है, बल्कि विभागीय मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त करना पूरे बल के मनोबल को गिराने वाला है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस जिला बल की महिलाएं दिन-रात सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए सड़कों पर तैनात रहती हैं, उन्हें अपने ही मुख्यालय में न्याय के लिए लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? पीड़ित महिला कर्मियों का यह मामला अब सिर्फ विभागीय नहीं, बल्कि एक सामाजिक मुद्दा बन गया है। कनीय अधिकारियों का मानना है कि आई टी प्रोग्रामर के ‘काले कारनामों’ ने पूरे तंत्र पर सवाल खड़ा कर दिया है।
दरभंगा के वरीय पुलिस अधीक्षक की छवि एक ईमानदार पदाधिकारी की रही है। ऐसे में आम जनता और विभाग के भीतर दबी जुबान से अब यह सवाल पूछा जा रहा है कि न्याय में देरी क्यों? यदि मुखिया ईमानदार हैं, तो फिर आईटी प्रोग्रामर द्वारा की गई बदसलूकी पर अब तक सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? एसएसपी कार्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर तैनात उक्त व्यक्ति के मन में महिला कर्मियों के प्रति ऐसी सोच और दुस्साहस कहां से आया?सुरक्षा का क्या होगा? यदि जिला मुख्यालय में ही महिला पुलिस कर्मी सुरक्षित नहीं महसूस करेंगी, तो जनता का भरोसा सिस्टम पर कैसे कायम रहेगा?यहां बता देना जरूरी हें कि महिला कर्मियों का ऑडियो और चैट ही कारवाई के लिये काफी था ,लेकिन मामले को रफा दफा करने के लिये पीड़ित महिला कर्मियों पर इतना दबाव बनाया गया जो खुद में काफी हें ,मामले को जांच में रखकर पूरे जिले के थानों में बितन्तु संवाद भेजकर महिला कर्मी को सूचना दी गई ,पहले व्हाट्स ऐप के जरिये अपनी अपनी शिकायत देने को कहा गया ,व्हाट्स ऐप पर कुछ महिला कर्मियों ने शिकायत दर्ज कराई तो लिखित रूप से देने को कहा गया ,लिखित रूप में मंगलवार को महिला कर्मी शिकायत देने आयी तो कुछ के साथ टाल मटोल का रवैया अपनाया गया,और उसका वीडियो भी बनाने की चर्चा हें। सूचना हें कि आईटी प्रोग्रामर का भी पक्ष लिया गया हें।खैर पक्ष तो आईटी प्रोग्रामर का भी लेना सही हें ,लकिन वाईरल हुये ऑडियो और सरकारी नंबर से चैट कारवाई के लिये ही काफी हें ,और चर्चा हें कि उक्त पीड़ित महिला कर्मी ने वायरल ऑडियो और चैट का समर्थन भी कर दिया हें ?फिर कारवाई में देरी होना कई सवालों को जन्म देता हें।
यह मामला अब प्रशासनिक परीक्षा की घड़ी बन चुका है। जनता का मानना है कि केवल जांच की खानापूर्ति काफी नहीं है। दोषियों पर अविलंब कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि पुलिस की कार्यशैली पर उठ रही उंगलियों को रोका जा सके और पीड़ित महिला कर्मियों का मनोबल वापस लौटे।
दरभंगा पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि वर्दी का सम्मान सर्वोपरि है या फिर महिलाओं के प्रति गलत आचरण रखने वाले लोंगों की मनमानी ?
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