बिहार में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: सभी 9 प्रमंडलों में बनेंगे विशेष निगरानी न्यायालय, हर जिले में होगा विजिलेंस थाना,

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सतर्कता जागरूकता दिवस पर की घोषणा, कहा- मंत्री, विधायक या अधिकारी, कोई भी भ्रष्टाचार में लिप्त मिला तो नहीं बख्शा जाएगा

दस्तक 7 मीडिया /पटना 

बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और सख्त करते हुए राज्य के सभी नौ प्रमंडलों में विशेष निगरानी न्यायालय (स्पेशल विजिलेंस कोर्ट) स्थापित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को ‘बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस’ एवं सतर्कता जागरूकता सप्ताह के उद्घाटन समारोह में इसकी घोषणा की। सरकार का उद्देश्य भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित कर दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों में विशेष निगरानी न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में निगरानी थाना तथा सभी अनुमंडलों में निगरानी ओपी की स्थापना की जाएगी, ताकि भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जांच और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में सरकारी गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। गवाहों को सुरक्षित वातावरण में बयान देने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं होगा। चाहे मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि या कोई बड़ा अधिकारी ही क्यों न हो, यदि वह भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उसका स्थान सीधे बेऊर जेल होगा।

सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्य महत्वपूर्ण कदमों की भी घोषणा की है। भ्रष्टाचार के मामलों में जब्त की गई संपत्तियों में सरकारी विद्यालय संचालित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। वहीं सरकारी कार्यालयों में फाइलों को बिना कारण एक माह से अधिक समय तक लंबित रखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा भ्रष्टाचार एवं साइबर अपराधों पर त्वरित नियंत्रण के लिए स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) के निरीक्षकों को जांच के अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बिना वारंट गिरफ्तारी करने का भी अधिकार मिलेगा।सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा, जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।