10 महीने से लापता दलित युवक मामले में हाईकोर्ट सख्त, भोजपुर पुलिस व उत्पाद विभाग को लगाई फटकार; CBI जांच की चेतावनी
10 महीने से लापता दलित युवक मामले में हाईकोर्ट सख्त, भोजपुर पुलिस व उत्पाद विभाग को लगाई फटकार; CBI जांच की चेतावनी
10 महीने से लापता दलित युवक मामले में हाईकोर्ट सख्त, भोजपुर पुलिस व उत्पाद विभाग को लगाई फटकार; CBI जांच की चेतावनी
दस्तक 7मीडिया /विधि संवाददाता
पटना हाईकोर्ट ने भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र से 10 महीने से लापता दलित युवक सनोज कुमार की बरामदगी में विफल रहने पर भोजपुर पुलिस और उत्पाद विभाग (Excise Department) को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान जांच की धीमी प्रगति और अधिकारियों के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पुलिस संतोषजनक जवाब देने में विफल रही तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा सकती है।
याचिका के अनुसार, बिहिया थाना क्षेत्र के गंज गांव निवासी गौरीशंकर राम के पुत्र सनोज कुमार को पिछले वर्ष 13 अगस्त को जगदीशपुर अनुमंडल के उत्पाद विभाग के कर्मियों ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि उसे हिरासत में लेने से पहले मारपीट भी की गई थी, जिसका सीसीटीवी फुटेज होने का दावा किया गया है। इसके बाद से युवक का कोई पता नहीं चल सका।
सुनवाई के दौरान उत्पाद विभाग ने अदालत को बताया कि सनोज कुमार उनकी गिरफ्त से भाग गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील पर गंभीर संदेह व्यक्त किया और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
खंडपीठ ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक से पूछा कि मामले में अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई है। साथ ही भोजपुर एसपी और बिहिया थाना प्रभारी समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों को सभी अभिलेखों के साथ 2 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। हालांकि, जिलाधिकारी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान की गई है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भोजपुर पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण कर वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच तेज करने का निर्देश दिया। साथ ही मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एक सब-इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।मामले को लेकर अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां पुलिस को अपनी जांच की प्रगति और उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्यौरा हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
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