दरभंगा पुलिस की दोहरी नीति :महिला कर्मियों का सवाल  “गलती हमारी हो तो कार्रवाई, उत्पीड़न करने वाले पर क्यों नहीं?’”आईटी प्रोग्रामर केस में महिला कर्मियों का फूटा दर्द, जांच और न्याय दोनों कटघरे में”

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

में महिला कर्मी हूँ ,में महिला सिपाही हूँ ,बहुत ही कमजोर हूँ ,थानाध्यक्ष से लेकर वरीय पुलिस पदाधिकारियों तक मेरी कोई हेसियत नहीं हें ,और में अनुशासन का पालन करती हूँ ,दिये गये निर्देश/ आदेश का पालन करती हूँ ,विभाग में कई मनचले पुरुष हें ,जिसके निशाने पर मैं हूँ ,फिर भी नौकरी करती हूँ ,परिवार चलाना हें ,घर संभालना हें ,बड़ी मेहनत से नौकरी मिली हें ,कुछ भी मैं गलत करती हूँ तो मुझपर कारवाई होती हें ,जैसी भी हूँ ,जितने में हूँ ,मेरी भी इज्जत हें ,मान हें ,मर्यादा हें ,ऐसे में कोई मनचला कर्मी मुझे बार बार निशाना बनाने का प्रयास करता हें ,हमें प्रताड़ित करता हें और बार बार ऐसा करता हें ,ऐसे में मैं किसके पास जाऊं ,अगर जाता हूँ शिकायत करने तो कहा जाता हें,दबाव बनाया जाता हें ,विभाग की बात हें मेनेज करो ,वरीय से लेकर कनीय पुलिस पदाधिकारी दबाव बनाते हें,सब ठीक हो जाएगा ?? यह कहां तक सही हें ,यह कहते हुये महिला कर्मी  रो पड़ती हें ,क्या दरभंगा पुलिस का यही न्याय हें ????एक सिपाही गलती करें तो तुरंत कारवाई ,और एक पुरुष कर्मी महिला को कितना भी प्रताड़ित करें तो कारवाई नदारत ,कहां का यह इंसाफ हें , दरभंगा पुलिस में लगता हें इसी तरह का इंसाफ हें ,जहां महिलाओं का कोई इज्जत नहीं ?महिला कर्मी कहती हें कि कितना हिम्मत जुटाकर में बयान दे रही हूँ ,जिसमें घर -परिवार और ससुराल के सभी लोग नाराज हें ,और विभाग में मुझे ऐसा लगता हें कि शिकायत कर मैंने बड़ा गुनाह कर दिया हें।

जी हाँ आईटी प्रोग्रामर के मामले में दूर दराज थाने से पहुंची महिला कर्मी /सिपाही यह कहते हुये रो पड़ी ?दरअसल आईटी प्रोग्रामर के मामले में एक ऑडियो और चैट वह भी सरकारी नंबर से वायरल हुआ था जो बेहद ही आपत्ति जनक था ,जिसे लेकर डीआईजी ने जांच का जिम्मा नगर पुलिस अधीक्षक को दिया ,नगर पुलिस अधीक्षक ने इसकी जांच मुख्यालय डीएसपी को  दे दिया ,मुख्यालय डीएसपी ने साईबर थाने में तैनात इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार को जांच का जिम्मा दिया ,महीने दिन से ज्यादा हो गये और इतने गंभीर आरोपों की जांच अबतक चल रही हें ,जबकि इस मामले में आईटी प्रोग्रामर पर उसी क्षण कारवाई हो जाना चाहिये था ?इतने गंभीर मामले में एक शिकायतकर्ता ही काफी थे ,फिर वरीय पुलिस पदाधिकारी को इतना दिमाग लगाने की जरूरत क्या थी ,पूरे जिले के थानों में पत्र घुमा दिया ,बावजूद चार महिलाकर्मियों ने हिम्मत तो जुटा ही दी जबकि सबको पता हें कि आईटी प्रोग्रामर के सिर पर किसका हाथ हें ?

मंगलवार के दिन यानि 30जून 26को मुख्यालय डीएसपी के यहा महिला कर्मी /महिला पुलिस को अपना पक्ष रखने कहा गया था ,जिले के 38थानों से चार महिला पुलिस /महिला कर्मी अपना पक्ष रखने आयी ,यह वह महिला कर्मी थी जिसने काफी हिम्मत जुटाई और अपना बयान दर्ज कराने आयी ,दूर दराज थाने से आयी थी ,दो महिला कर्मी का बयान कलमबद्ध हुआ और दो महिला कर्मी को कहा गया आप बाहर में रहिये आपका भी पक्ष लेंगे ,लेकिन दोनों महिला कर्मी दिन के 11बजे से शाम के 6बजे तक मुख्यालय डीएसपी कार्यालय के बाहर घूमती रही लेकिन उसका पक्ष किसी ने नहीं सुना ?खैर दो महिला कर्मी का बयान दर्ज हुआ और बड़ी हिम्मत जुटाते हुये दोनों ने अपना बयान कलमबद्ध करायी ?

जिस महिला कर्मी का ऑडियो और चैट वायरल हुआ था ,उस महिला कर्मी ने अक्षरशः बयान कलम बद्ध करा दिया ?चर्चा हें कि ऑडियो और चैट को उसने सही करार दिया हें।

मुख्यालय डीएसपी का बितन्तु संवाद जब सभी थानों में भेजा गया था ,उसमें कहा गया था कि साईबर थाना के इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार का नंबर हें ,जिन्हें भी शिकायत हें इस नंबर पर मेसेज करें ,या फोन से बात कर आईटी प्रोग्रामर के विरुद्ध शिकायत करें।जब महिला कर्मी ने अपनी शिकायत उनके व्हाट्स ऐप नंबर पर किया तो उनका कहना था कि हार्ड कॉपी में शिकायत करें और मंगलवार का दिन तय हुआ ,जब हार्ड कॉपी में लिखित शिकायत महिला कर्मियों ने दी ,तो कहा गया कि हार्ड कॉपी के अलावे वीडियो बनेगा और वीडियो बनाया गया ?ऐसा लग रहा था कि मुख्यालय डीएसपी और साईबर थाना के इंस्पेक्टर आईटी प्रोग्रामर पर लगे आरोप के बदले महिलाकर्मी को  ही गुनेह्गार साबित करने में लगे हो ?जबकि वायरल ऑडियो और सरकारी नंबर से हुआ ,चैट ही आईटी प्रोग्रामर पर कारवाई के लिये काफी हें क्यूंकि सबूत ढूंढने की जरूरत नहीं थी ,सब कुछ सरकारी नंबर से हुआ हें और वह पुख्ता सबूत हें ,लेकिन इस मामले को दबाने के लिये दरभंगा के आलाधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी हें ,और यही कारण हें कि महीनों बीत गये।दरभंगा डीआईजी छुट्टी पर हें ,अब देखना हें कि साईबर थाना में तैनात इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार अपने जांच प्रतिवेदन में किया खुलासा करती हें ??

इधर साईबर इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार का कहना हें कि दो महिला कर्मियों का बयान कलमबद्ध किया गया जिसमें काफी समय लगा ,और वे कोर्ट चली गयी ,जिसके कारण दो महिला कर्मियों का बयान दर्ज नहीं हो सका।