दरभंगा का ‘अवैध कॉरिडोर, बेनीपुर-बिरौल-गंडौल स्टेट हाईवे पर मौत का तांडव, कागजात गायब और सिस्टम ‘मौन’

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल/बेनीपुर, दरभंगा।

जिले के बेनीपुर और बिरौल अनुमंडल की सड़कें इस समय पूरी तरह से ‘अवैध’ हो चुकी हैं। स्टेट हाईवे की रफ्तार भरी सड़कों पर मौत का साया बनकर दौड़ रहे तीन पहिया ऑटो रिक्शा ने यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। हैरानी की बात यह है कि नियम-कानूनों की परवाह किए बिना चल रहे इन वाहनों को ‘प्रशासनिक संरक्षण’ का कवच प्राप्त है, जिसके कारण आम जनता खुद को भगवान भरोसे छोड़ने को मजबूर है।
नियमों की किताब स्पष्ट कहती है कि तीन पहिया वाहनों का नेशनल और स्टेट हाईवे पर परिचालन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, बिरौल,बेनीपुर और गंडौल के प्रमुख स्टेट हाईवे पर इन ऑटो का वर्चस्व है। पड़ताल से पता चलता है कि इनमें से अधिकांश ऑटो का न तो कोई रजिस्ट्रेशन है, न फिटनेस सर्टिफिकेट और न ही इनके पास स्टेट हाईवे पर चलने का कोई वैध रोड परमिट।
बिना परमिट के व्यावसायिक वाहनों का यह बेरोकटोक चलना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ा वित्तीय और शारीरिक जोखिम भी है। यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो बीमा का लाभ मिलना भी असंभव हो जाता है, क्योंकि वे वाहन अवैध रूप से सड़क पर उतर रहे हैं।

‘हफ्ता वसूली’ का खेल या विभागीय विफलता?

स्थानीय लोगों के बीच एक ही सवाल चर्चा का विषय है—आखिर इन ऑटो को स्टेट हाईवे से हटाने की हिम्मत पुलिस और परिवहन विभाग क्यों नहीं जुटा पा रहा है? लोगों का आरोप है कि इस अवैध परिचालन के पीछे का ‘सच’ हफ्ता वसूली का एक संगठित तंत्र है। बिना संबंधित पदाधिकारी की मिलीभगत के हाईवे पर इस स्तर का गैर-कानूनी खेल चलना नामुमकिन है। यह ‘सिस्टम’ और ‘अपराध’ का एक ऐसा गठजोड़ है, जिसमें आम आदमी की सुरक्षा की बलि चढ़ाई जा रही है।

दुर्घटनाओं को निमंत्रण, सिस्टम की चुप्पी–

हाईवे पर तेज रफ्तार 04–06–10–पहिया वाहनों और धीमे चलने वाले तीन पहिया ऑटो का यह बेमेल हर पल किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहा है और पूर्व में भी दे चुका है। सड़कों पर लगने वाला भीषण जाम अब रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। सबसे ज्यादा चिंताजनक पहलू यह है कि सड़क दुर्घटनाओं के बाद पुलिस की जांच भी केवल खानापूर्ति तक सीमित रहती है। दुर्घटना के बाद पुलिस द्वारा जब्त किए गए ऑटो के परमिट की गहराई से जांच नहीं की जाती, जिससे यह पता ही नहीं चल पाता कि इन वाहनों का वास्तविक ‘रूट चार्ट’ क्या है।