फरार सिपाही से लेकर आईटी प्रोग्रामर तक: दरभंगा पुलिस की कार्यशैली कटघरे में ? डीजीपी साहब, ऐसे अफसर आपके सुशासन पर लगा रहे हैं दाग ।एक सिपाही को बचाने के लिये दरोगा और इंस्पेक्टर की दी जा रही हे बलि ?

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

वैसे तो कई मामले हे लेकिन दो मामले ऐसे हे जो दरभंगा जिला की पुलिसिंग को दागदार कर दिया हे ,शायद पड़ोसी जिला की बुरी नजर पर गई हो ?डीजीपी साहब ,आप कितना भी दिन रात काम कर ले ,बेहतर पुलिसिंग के लिये निर्देश/आदेश देते रहे , लेकिन ऐसे ऐसे वरीय पुलिस पदाधिकारी जिला बल में हे ,जो कहने के लिये ईमानदार तो हे लेकिन उनकी कार्यशैली देख सभी हक्का -बक्का हें ?

जी हाँ दरभंगा जिला के दो ऐसे मामले हे जो चर्चा का विषय हे। दोनों मामले की बात करें तो एक मामला यातायात थाना से संबंधित हे तो दूसरा एसएसपी कार्यालय में तैनात आईटी प्रोग्रामर का हे ,इन दोनों मामलों ने जिला के डीएसपी से लेकर डीआईजी के कार्यशैली पर प्रश्न खड़ा कर दिया हे ? दरअसल आईटी प्रोग्रामर और एक सिपाही यानि दोनों को बचाने के लिये सारे पुलिस पदाधिकारियों ने एड़ी -चोटी एक कर दिया हे।ऐसे में कई सवाल उठ रहे हें ?

जी हाँ यातायात थाना के तात्कालीन सिपाही /656 धनंजय कुमार पर कई लाख रुपये लेकर फरार होने के आरोप हें और इस मामले में  लहेरियासराय थाने में प्राथमिकी 380/24 दिनांक 15/7/24को दर्ज की गई थी ,दो साल से अधिक बीत जाने के बावजूद सिपाही धनंजय का अता -पता नहीं हे ,उसे जमीन निगल गया या फिर आसमान ,दरभंगा पुलिस अबतक पता नहीं कर पायी हे ,उसपर 5लाख 67हजार रुपये वाहन चेकिंग चालान मद में लेकर फरार होने का आरोप हे ?सवाल यहां यह खड़ा होता हे कि क्या 5लाख 67 हजार रुपये लेकर कोई सिपाही फरार हो सकता हे ?यह बात किसी को भी हजम नहीं होती ?अगर सही और निष्पक्ष जांच हो तो चर्चा हे कि कई लाख  रुपये लेकर वह सिपाही फरार हुआ हे।अब इतने दिन बीत जाने के बाद इस बीच चर्चा हे कि एक सिपाही को बचाने के लिये दारोगा और इंस्पेक्टर से जबरन रुपयों की वसूली कर बलि चढ़ाई जा रही  हे ,अगर यही बलि दारोगा और इंस्पेक्टर को देना था तो उस वक्त प्राथमिकी ही दर्ज नहीं करना था।

जी हाँ 5लाख 67हजार रुपये की तात्कालीन और वर्तमान में दारोगा और इंस्पेक्टर से वसूल की गई हे,चर्चा हें कि कुछ वसूली अभी भी जारी हे।अगर मान ले कि पांच लाख 67हजार नाजायज और दबाव डालकर दारोगा और इंस्पेक्टर से वसूल भी लिया जाय तो दर्ज कांड में रुपये कि बराबरी होना भी अनुसंधानक के लिये खतरा हे ,क्यूंकि यह राशि दो साल पहले सिपाही लेकर फरार हुआ और अब हाल के दिनों में ऑन लाईन पैसे जमा हो रहे हे ,ऐसे में सवाल उठना लाजमी हे ?और ऑन लाईन जमा हुये राशियों के तिथियों को देखकर पूरा मामला भी स्पष्ट हो जाता हे  ?इसे स्थानीय पुलिस का बेहतर मेनेजमेंट कह सकते हे लेकिन ऐसे ही कारनामों को लेकर न्यायालय में पुलिस की हद पीट जाती हें ,मतलब सिपाही के द्वारा रुपया लेकर भागने की तिथि और उसके बाद ऑन लाईन जमा हुये पैसे स्पष्ट हें कि तिथियों में अंतर हें।

वहीं दूसरा मामला एसएसपी कार्यालय में तैनात आईटी प्रोग्रामर को लेकर हे ,एक महिला कर्मी का ऑडियो और सरकारी नंबर पर चैट ही उसके कारवाई के लिये काफी हे,उस महिला सिपाही के ऑडियो और चैट से साबित होता हे कि महिला कर्मी को अपने बस में करने के लिये आईटी प्रोग्रामर ने सारी हदें पार कर दी जो पुलिस जैसे अनुशासित  विभाग के लिये किसी कलंक से कम नहीं हे ,और ऐसा कई महिला कर्मियों के साथ दरभंगा जिला बल में आईटी प्रोग्रामर द्वारा किया गया , लेकिन इस मामले को रफा दफा करने के लिये जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारियो ने एड़ी चोटी एक कर दिया हे ,आखिर ऐसा कौन सा राज हें जिसके लिये वरीय पुलिस पदाधिकारी आईटी प्रोग्रामर को बचा रहे हें ,जबकि उसकी कथित घिनौनी करतूत सबके सामने हें।डीआईजी ने इस मामले में जांच का जिम्मा 28मई को ही नगर पुलिस अधीक्षक को दिया नगर पुलिस अधीक्षक ने इस मामले की जांच मुख्यालय डीएसपी को दे दी ,मुख्यालय डीएसपी ने इस मामले की जांच साईबर थाना में तैनात इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार को दे दिया।इतने सीढ़ियों से यह जांच गुजर रहा हें।डीएसपी मुख्यालय ने कहा कि ऑडियो और चैट महिला कर्मी का हें इसीलिये जांच तो महिला पुलिसकर्मी करेगी।बितन्तु में दिये गये डीएसपी द्वारा थानाध्यक्ष को निर्देश ही अपने आप में कई सवाल खड़ा करता हें।

सूत्रों का कहना हे कि कई महिला कर्मी ने इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार को उनके व्हाट्स ऐप और उनके नंबर पर आईटी प्रोग्रामर के विरुद्ध हिम्मत दिखाते हुये अपना शिकायत दर्ज करा दी हे ,चर्चा यह भी हे कि जिस महिला कर्मी का ऑडियो चैट वायरल हुआ था उसने भी अपना पक्ष खुले और स्पष्ट रूप से रख दिया हे ,अब इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार के प्रतिवेदन से स्पष्ट हो पाएगा कि वह वरीय पुलिस पदाधिकारी के दबाव में प्रतिवेदन लिखेगी या ईमानदारी पूर्वक प्रतिवेदन वरीय पदाधिकारी को सौंपेगी ?यहा बता देना जरूरी हे कि ऑडियो और सरकारी नंबर पर हुये चैट ही आईटी प्रोग्रामर पर कारवाई के लिये काफी था लेकिन अब तो कई महिला कर्मी भी इतना बता चुकी हे ,जो कारवाई के लिये काफी हे।आईटी प्रोग्रामर से वरीय पदाधिकारियों का कैसा मेल जोल ,यह आम लोंगों में चर्चा का विषय हे ,लोंगों का तो यही कहना हे कि इस आचरण वाले कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज देना चाहिये ताकि भविष्य में किसी महिला कर्मी के साथ ऐसी घटना नहीं हो ?महिला कर्मी को उचित सम्मान और सुरक्षा देना भी वरीय पुलिस पदाधिकारियो की जवाबदेही हे ,वह भी किसी घर की बहू हे तो किसी घर की बेटी।इंस्पेक्टर श्वेता पोद्दार ने कहा कि जांच जारी हें।