मोतिहारी में बड़ी पुलिसिया कार्रवाई: तुरकौलिया SHO सम्पत कुमार निलंबित,करीब 35 लाख रुपये बरामदगी के मामले की जांच तेज ,पुलिस अधीक्षक के तल्ख तेवर।

दस्तक 7 मीडिया /

मोतिहारी जिले के पुलिस महकमे में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने तुरकौलिया थाना के प्रभारी सम्पत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई कार से करीब 35 लाख रुपये की बरामदगी और ड्रग्स से जुड़े मामले में उनके संदिग्ध आचरण तथा प्राथमिकी (FIR) में तथ्यों को कथित रूप से तोड़-मरोड़कर दर्ज करने के आरोपों के आधार पर की गई है।

एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। प्रशिक्षु डीएसपी ऋषभ कुमार को प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार, लापरवाही या किसी भी प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित पक्ष की ओर से दिए गए आवेदन में एक डीएसपी, दो थानाध्यक्षों और दो कथित दलालों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, 25 मई की रात चकिया टोल प्लाजा के पास एक कार को रोका गया था, लेकिन इस मामले की एफआईआर 28 मई को तुरकौलिया थाने में दर्ज की गई। आवेदन में सवाल उठाया गया है कि जब कथित कार्रवाई चकिया थाना क्षेत्र में हुई थी, तो मामला तुरकौलिया थाने में क्यों दर्ज किया गया और एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी क्यों हुई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि हिरासत के दौरान गांजा-चरस के मामले में फंसाने की धमकी देकर 35 लाख रुपये की अवैध वसूली की गई। आवेदन में कई दस्तावेजों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच शुरू होने के बाद कथित दलालों के माध्यम से कुछ राशि वापस कराकर शिकायत वापस लेने का वीडियो भी बनवाया गया।

फिलहाल एसआईटी और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन, केस डायरी और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। रिश्वतखोरी और धमकी के आरोपों की भी गहन पड़ताल की जा रही है। अब सबकी निगाह जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामदगी की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार थी या मामले में किसी बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होना बाकी है।