SVU की बड़ी कार्रवाई: आईएएस संजीव हंस समेत 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, करोड़ों की रिश्वत और संपत्ति का खुलासा

दस्तक 7मीडिया /पटना

भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बहुचर्चित रिशुश्री-संजीव हंस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कर दिया है। SVU थाना कांड संख्या-05/2025 में 23 जून 2026 को दाखिल चार्जशीट में तत्कालीन जल संसाधन विभाग के सचिव रहे आईएएस अधिकारी संजीव हंस, कारोबारी रिशुश्री, संतोष कुमार, पवन कुमार समेत तीन अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।

SVU के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त तथ्यों और विस्तृत जांच के आधार पर मामले की पड़ताल की गई। जांच के दौरान प्राथमिकी में नामजद आरोपियों के अलावा तत्कालीन संयुक्त सचिव (वित्त विभाग) मुमुक्षु कुमार चौधरी, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता तारणी दास तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह की संलिप्तता भी सामने आई।

जांच में रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े के मिले साक्ष्य

SVU के अनुसार जांच में यह प्रमाणित हुआ कि आरोपियों ने भ्रष्ट एवं अवैध तरीकों से सरकारी ठेकों और निविदाओं में लाभ पहुंचाने, रिश्वत लेने-देने, दस्तावेजों में हेरफेर तथा सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का काम किया। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

संजीव हंस पर कोशी प्रोजेक्ट में अनियमितता का आरोप

जांच में पाया गया कि जल संसाधन विभाग में सचिव रहते हुए संजीव हंस ने सुपौल के वीरपुर स्थित कोशी बेसिन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (KBVDP) के तहत फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की स्थापना में अनियमितताएं बरतीं। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह भी सामने आया कि उन्हें M/s Matriswa Infra Pvt. Ltd. और रिशुश्री से कथित रूप से कमीशन के रूप में रिश्वत मिली थी।

7-8 वर्षों में खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य

SVU के अनुसार रिशुश्री सरकारी विभागों में बिल पास कराने के बदले अधिकारियों को 2 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन देता था। इसी प्रभाव का उपयोग कर उसने विभिन्न विभागों में ऊंची दरों पर ठेके हासिल किए और पिछले 7-8 वर्षों में भारी संपत्ति अर्जित की।

छापेमारी के दौरान उसके ठिकानों से करीब 53.5 लाख रुपये नकद, 2.13 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण, 58.58 करोड़ रुपये सर्किल मूल्य वाली 61 सेल डीड, तथा कई महंगे वाहनों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।

तीन अधिकारियों पर भी रिश्वत लेने के आरोप

जांच रिपोर्ट के अनुसार रिशुश्री ने अपने सहयोगियों के माध्यम से कई सरकारी परियोजनाओं की निविदाएं हासिल कीं और संबंधित अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत पहुंचाई।

* मुमुक्षु कुमार चौधरी पर सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए लगभग 10 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में पक्षपातपूर्ण लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। ED की छापेमारी में उनके आवास से 2 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे।
* तारणी दास पर भवन निर्माण विभाग की 10 से अधिक निविदाओं में सहयोग के बदले 2-3 प्रतिशत रिश्वत लेने का आरोप है। उनके घर से 8.57 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए थे।
* उमेश कुमार सिंह पर बुडको एवं नगर विकास विभाग की परियोजनाओं में 1 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप है। उनके आवास से 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुआ था।

सात आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ आरोप पत्र

अनुसंधानकर्ता पुलिस उपाधीक्षक चंद्रभूषण द्वारा जिन सात आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनमें रिशुश्री, संजीव हंस, संतोष कुमार, पवन कुमार, मुमुक्षु कुमार चौधरी, तारणी दास और उमेश कुमार सिंह शामिल हैं।

SVU का कहना है कि मामले में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, कूटरचना और सरकारी प्रक्रियाओं में अवैध हस्तक्षेप के आरोपों की पुष्टि हुई है। अब मामले की सुनवाई न्यायालय में आगे बढ़ेगी।