पुलिस लाइन में घूम रहा था फर्जी सिपाही, वर्दी-आईकार्ड और वीआईपी ड्यूटी कार्ड के साथ गिरफ्तार

दस्तक 7मीडिया /कटिहार

बिहार के कटिहार जिले में पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जो खुद को पुलिस विभाग का सिपाही बताकर कई दिनों से पुलिस लाइन परिसर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में घूम रहा था। आरोपी की पहचान कैमूर जिले के मोहनिया थाना क्षेत्र निवासी 23 वर्षीय सुशील कुमार के रूप में हुई है। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी स्वयं को अररिया जिले में तैनात सिपाही बताकर पुलिस लाइन में आने-जाने के साथ अन्य पुलिसकर्मियों से मेलजोल बढ़ाने का प्रयास कर रहा था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर नगर थाना पुलिस ने निगरानी शुरू की और जाल बिछाकर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में उसका दावा पूरी तरह फर्जी निकला।

तलाशी के दौरान आरोपी के पिट्ठू बैग से पुलिस की वर्दी, जूते, बैज, नेम प्लेट, फर्जी पुलिस पहचान पत्र तथा गृहमंत्री के रोहतास दौरे से संबंधित कथित वीआईपी ड्यूटी कार्ड बरामद किए गए। बरामद सामान को देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने अररिया जिले में कई लोगों को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने तथा विभिन्न मामलों को रफा-दफा कराने का झांसा देकर ठगी की थी। पुलिस अब इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है।

सदर डीएसपी विशाल आनंद ने बताया कि पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी पुलिस लाइन जैसे संवेदनशील परिसर में इतने दिनों तक कैसे पहुंचता रहा और कहीं उसे विभाग के किसी गोपनीय दस्तावेज या जानकारी तक पहुंच तो नहीं मिली। आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में यह भी पता चला है कि वह पुलिस वर्दी पहनकर तस्वीरें खिंचवाता था और उन्हें अपनी पत्नी व अन्य परिजनों को भेजता था, ताकि वे उसे वास्तविक पुलिसकर्मी समझें।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पुलिस का प्रतिरूपण करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही उसके बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल्स और संभावित नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

इस घटना ने पुलिस लाइन जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है।