बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव: 425 संवेदनशील थानों की कमान अब इंस्पेक्टरों के हाथ 

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

बिहार पुलिस में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, आधुनिक तथा जवाबदेह बनाने की दिशा में पुलिस मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार द्वारा जारी आदेश के तहत राज्य के 425 प्रमुख एवं संवेदनशील थानों में अब सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) के बजाय इंस्पेक्टर (पुलिस निरीक्षक) स्तर के अधिकारियों को थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार राज्य में पहले से 208 थानों में इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी थानाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। नए आदेश के तहत 217 अतिरिक्त थानों को इस श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके साथ ही अब बिहार के कुल 425 थानों का नेतृत्व इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे।

जानकारी के अनुसार जिन थानों में सालाना औसतन 350 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होते हैं अथवा जो अपराध और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अपग्रेड किया गया है। राजधानी पटना के राजीव नगर, बिहटा, रूपसपुर, मनेर समेत 55 थाने भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।

थानाध्यक्ष को मिलेंगी अंचल निरीक्षक की शक्तियां

नई व्यवस्था के तहत इन थानों के थानाध्यक्ष अपने क्षेत्र के पदेन अंचल निरीक्षक (एक्स-ऑफिसियो सर्किल इंस्पेक्टर) भी होंगे। उन्हें सर्किल इंस्पेक्टर स्तर की सभी प्रशासनिक और पर्यवेक्षण संबंधी शक्तियां प्राप्त होंगी, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।

अनुसंधान और विधि-व्यवस्था के लिए अलग इकाई

नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए थानों के कार्यों को दो अलग-अलग इकाइयों में विभाजित किया जाएगा।

पहली अनुसंधान इकाई (इन्वेस्टिगेशन यूनिट) होगी, जो मुकदमों की वैज्ञानिक और गुणवत्तापूर्ण जांच पर ध्यान देगी। इसका नेतृत्व एक अपर थानाध्यक्ष स्तर के सब-इंस्पेक्टर करेंगे।

दूसरी विधि-व्यवस्था इकाई (लॉ एंड ऑर्डर यूनिट) होगी, जो क्षेत्र में शांति व्यवस्था, गश्ती और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी। इसका नेतृत्व भी एक अलग सब-इंस्पेक्टर करेंगे।

साइबर अपराध और महिला सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस

पुलिस मुख्यालय का मानना है कि अनुभवी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती से महिला हेल्प डेस्क, साइबर अपराध, किशोर अपराध और संवेदनशील मामलों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। बड़े और जटिल मामलों में मौके पर त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।

बिना अतिरिक्त खर्च लागू होगी व्यवस्था

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव के लिए कोई नया पद सृजित नहीं किया जाएगा। जिलों में पहले से स्वीकृत पदों और उपलब्ध मानव संसाधन के आधार पर ही 425 इंस्पेक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

प्रभार देने पर भी सख्ती

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन थानों का प्रभार नियमित रूप से इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के पास ही रहेगा। आपात स्थिति या अल्पकालिक अवकाश को छोड़कर किसी सब-इंस्पेक्टर या उससे नीचे के अधिकारी को पूर्णकालिक रूप से इन थानों की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।

पुलिस मुख्यालय के इस निर्णय को बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक पेशेवर, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।