“दस दिन में पत्रकार जेल, एक माह बाद भी आरोपी फरार: केवटी पुलिस की दोहरी नीति चर्चा में”“एससी/एसटी एक्ट में ‘दलाली’ और पुलिस की दोहरी कार्रवाई पर उठे सवाल

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

दरभंगा जिला में अबतक जमीन खरीद फरोक्त ,अंचल थाना या फिर और कार्यालय में अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे दलाल के बारे में सुने होंगे ,एससी /एसटी एक्ट मामले में किसी दलाल का नाम नहीं सुने होंगे ,पर आपको यकीन करना पड़ेगा कि इस एक्ट के तहत केस दर्ज कराने और सरकार के तरफ से मिलने वाली सरकारी पैसों में भी दलाल काम करते हे

जी हाँ यह सत्य हे ,इस जिला में कुछ ऐसे कथित दलित नेता हे जिनके कानों तक यह बात जानी चाहिये कि दो समुदायों में झगड़ा हुआ हे ,उक्त झगड़े में अगर अनुसूचित जाति  /अनुसूचित जनजाति हे फिर इनका कमाल देखिये।कथित नेता जी बिना देर किये उन जगहों पर पहुँच जाते हे ,और इस जाती के लोंगों को भड़काना शुरू कर देते हे और फिर खेल खेलते हे ,प्राथमिकी दर्ज कराने के नाम पर व्यक्ति का शोषण करते हे और आवेदन लिखवाकर थाना भेजवा देते हे और दबाव डालकर प्राथमिकी दर्ज करा देते हे ,कांड को सत्य करार करने के नाम पर पैसा भी बांटते हे और बाद में सरकार से मिले मुआवजों में बंदरबांट कर लेते हे और इनका धंधा भी चलता हे और लोंगों के बीच दबंगई भी ?केवटी थाना में पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट के विरुद्ध हुई प्राथमिकी और गिरफ्तारी इसी का परिणाम हे।पुलिस को ऐसे लोंगों के विरुद्ध भी कारवाई करना चाहिये जो सामाजिक अस्थिरता पैदा करते हे और इस एक्ट का दुरुपयोग करते हे ?

इस मामले में सदर डीएसपी 2 की कार्यशैली पर भी सवाल उठाना लाजमी हे ,कहा जाता हे कि दस दिन भी नहीं बीते थे ,उन्होंने अपने पर्यवेक्षण में मामले को सत्य करार दे दिया और थाना पुलिस अपराधियों की तरह पत्रकार को पकड़कर जेल भेज दिया यहां तक कि खाना खा रहे पत्रकार को खाने तक नहीं दिया ,यह पूरी तरह से सोची समझी साजिश थी और प्रमुख और बीडीओ के प्रभाव में आकर पुलिस ने ऐसी कारवाई कर दी।इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक छुट्टी पर थे।

इस मामले में ऐसा प्रतीत होता हे कि अप्रत्यक्ष रूप से पुलिस के अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर पत्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया ,जैसे पत्रकार बड़ा अपराधी हो ?

केवटी पुलिस की दोहरी नीति इन दिनों चर्चा का विषय हे ?केवटी थाने में दर्ज दो मामले को अगर गौर से देखिये तो पूरे मामले से ऐसे पर्दा हटेगा जैसे आईने में आप चेहरा देख रहे हो ?ऐसे में केवटी पुलिस की दोहरी नीति कैसे साफ हो रही हे यह समझिये। केवटी थाना कांड संख्या 176/26में प्राथमिकी दर्ज होते ही पुलिस ने महज दस दिनों के भीतर एक पत्रकार को जेल भेजकर अपनी वाह वाही थपथपा ली वहीं कांड संख्या 177/26के मामले में महीना बीत जाने के बाद केवटी पुलिस ने जानलेवा हमला ,लूटपाट के अपराधियों को पकड़ना उचित नहीं समझा ?इस मामले में सरकार के अभिन्न अंग विधायक डॉ मुरारी मोहन झा को  केवटी पुलिस के विरुद्ध धरणा देना पड़ा लेकिन अब तक कोई फलाफल नहीं निकला,इन दोनों मामले के अवलोकन से केवटी पुलिस का चेहरा दागदार दिख रहा हे ,हालांकि पत्रकारों का एक शिष्ट मंडल एसएसपी से बात कर पूरे मामले से अवगत कराया हे।पत्रकार का दोष बस इतना था कि योजना में अनियमितता को लेकर प्रखंड प्रमुख और बीडीओ के विरुध्द खबर छापा था ,खबर के आलोक में जांच हुई और डीएम ने मामले को सही पाया यही नहीं डीएम ने प्रमुख से  13लाख 50हजार रुपये वसूली का निर्देश दिया ,इस बात से आक्रोशित प्रमुख ने नेता जी के पहल पर फर्जी मुकदमा पत्रकार समेत एक अन्य पर करा दिया ,अब आयुक्त ने प्रमुख के पदच्युत के लिये सरकार को भी पत्र लिख दिया हे।पत्रकार का कसूर बस इतना था कि इस अनियमितता को लेकर खबर छापा और खबर के आलोक में कारवाई हुई।दरअसल भ्रष्ट लोंगों की लंबी कतार होती हे और इनका शिकार इन दिनों पत्रकार हो रहे हे।पत्रकार तो संवाद वाहक हे इनका क्या कसूर ?