बिहार में पहली बड़ी मिसाल: SVU के ट्रैप केस में महिला दरोगा दोषी, रिश्वत लेते पकड़ी गईं तो मिली 3 साल की सजा
बिहार में पहली बड़ी मिसाल: SVU के ट्रैप केस में महिला दरोगा दोषी, रिश्वत लेते पकड़ी गईं तो मिली 3 साल की सजा
बिहार में पहली बड़ी मिसाल: SVU के ट्रैप केस में महिला दरोगा दोषी, रिश्वत लेते पकड़ी गईं तो मिली 3 साल की सजा
दस्तक 7मीडिया ,पटना/हाजीपुर।
भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। वैशाली जिले के हाजीपुर टाउन थाना में पदस्थापित रही महिला सब इंस्पेक्टर पूनम कुमारी को रिश्वतखोरी के मामले में विशेष न्यायालय ने दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। माना जा रहा है कि SVU द्वारा दर्ज ट्रैप मामलों में यह पहली महत्वपूर्ण दोषसिद्धि (Conviction) है, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियों की कार्रवाई को नई मजबूती दी है।
विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस) अतुल कुमार सिंह की अदालत ने विशेष मामला संख्या 17/2024 की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी महिला पुलिस अधिकारी को दोषी पाया। अदालत ने उन्हें तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला 14 नवंबर 2024 का है, जब पूनम कुमारी हाजीपुर टाउन थाना में उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत थीं। आरोप था कि उन्होंने नितेश बस सर्विस के प्रबंधक पंकज कुमार द्विवेदी से 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। यह राशि एक बस को डीटीओ कार्यालय से रिलीज कराने के लिए आवश्यक पत्राचार और प्रशासनिक कार्रवाई कराने के एवज में मांगी गई थी।
शिकायत मिलने के बाद विशेष निगरानी इकाई ने सत्यापन कराया और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की। SVU की टीम ने महिला दरोगा को उनके आवास पर ही रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद SVU थाना कांड संख्या 06/2024 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने रिश्वत लेने के आरोप को प्रमाणित करने वाले साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिन्हें अदालत ने पर्याप्त माना और आरोपी को दोषी करार दिया।
इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। खासकर पुलिस विभाग में यह निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पद और वर्दी का दुरुपयोग करने वालों को कानून के कठघरे में जवाब देना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई करने वाली एजेंसियों का मनोबल भी मजबूत होगा। वहीं, निगरानी और विशेष निगरानी इकाई की ओर से दर्ज मामलों में यह फैसला भविष्य के अभियोजन के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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