दरभंगा पुलिस में आईटी प्रोग्रामर विवाद: कार्रवाई के बजाय ‘शून्य प्रतिवेदन’ पर जोर, विभागीय मंशा पर उठे सवाल,डीआईजी के कड़े रुख के बाद आनन फानन में  डीएसपी मुख्यालय ने दिया जिले भर के थानाध्यक्षों को बितन्तु संवाद के माध्यम से निर्देश ?

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय दरभंगा में प्रतिनियुक्त आईटी प्रोग्रामर निशांत कुमार से जुड़े कथित वायरल ऑडियो, मोबाइल चैट और अन्य आरोपों के मामले में पुलिस के अधिकारियों ने ढुलमूल रवैया अपनाया है।उसपर कारवाई करने के बजाय मामले को रफा दफा करने में जुटना प्रतीत हो रहा हे।पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) कार्यालय की ओर से मंगलवार को जारी वितंतु संवाद को पढ़ेंगे तो अपने आप में आप दंग रह जाएंगे ,बितन्तु संवाद में जारी किये गये निर्देश अपने आप में कई सवाल खड़ा करता हे ?क्या कोई महिला कर्मी अपनी निजता भंग करेगी ?क्या महिला कर्मी /महिला सिपाही इतना हिम्मत जुटा पाएगी ,जहां वरीय पुलिस पदाधिकारियों के देख रेख में आईटी प्रोग्रामर फल फूल रहा हो ?प्रताड़ित कई महिला कर्मी ने इस पत्रकार से कहा कि मेरी हिम्मत नहीं हे ,अगर हम खुलकर बोलते हे तो परिवार के लोंगों का भी गुस्सा हमपर फूटेगा ,और वरीय पुलिस अधिकारी के कारवाई का शिकार भी हम ही बनेंगे ,ऐसे में हिम्मत जुटाना मुश्किल काम हे।

वहीं दूसरी और देखें तो ऑडियो चैट सरकारी नंबर 9031827395 से हे जिसमें स्पष्ट हे और मेसेज में लिखा गया हे कि ज्यादा दिक्कत हो रहा हे तो मेरे डेरा पर रह लीजिये और यही से अप डाउन कीजिये।यही नहीं चैट में महिला कर्मी द्वारा बात नहीं मानने पर स्पष्टीकरण भी पूछा गया हे जो स्पष्ट हे।हम सेल्यूट उस महिला कर्मी का जरूर करेंगे जो हिम्मत दिखाते हुये मनचले का विरोध किया हे।

इस चैट को गौर से देखिये ,सरकारी नंबर भी हे और महिला कर्मी से बात नहीं मानने पर स्पष्टीकरण भी पूछा गया हे ,यही नहीं उक्त महिला से जुड़े अगर अभिलेख देखेंगे तो एक साल के भीतर महिला कर्मी कितना प्रताड़ित हुई हे ,वह स्पष्ट पता चलेगा ?

और इस आरोप का समर्थन वह ऑडियो कर रहा हे जो वायरल हुआ हे।अगर वरीय पदाधिकारियों का दबाव इस महिला कर्मी को दिखाई देगा तो वह दबाव के कारण मुकर भी सकती हे लेकिन अगर व्हाट्स ऐप कॉल का डिटेल निकाला जाय तो सभी मामले सामने आ जाएंगे,और साक्ष्य के लिये काफी हे वजह सरकारी मोबाईल नंबर हे।अगर ऐसे ऐसे कर्मियों को विभाग बचाने का प्रयास करेगी तो आने वाले दिनों में बड़ा बवंडर हो सकता हे ,जो विभाग के लिये खतरनाक हे।ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुये विभाग के अधिकारियों को चाहिये कि बेलट्रोंन को पत्र लिखकर इसे यहा से अन्यत्र ,पुलिस विभाग को छोड़कर कहीं पदस्थापित करें अन्यथा बर्खास्त करें ?पुलिस जैसे अनुशासनिक विभाग को ऐसे लोंगों से दूर रखना चाहिये ताकि विभाग का मर्यादा बनी रहे ?

इस ऑडियो को सुनिये ,चैट का समर्थन ऑडियो कर रहा हे ?

यहां बता दे कि बितन्तु संवाद में जिले के सभी थानाध्यक्षों और पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया हे कि  सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर आईटी प्रोग्रामर निशांत कुमार और एक महिला कर्मी के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत, चैट तथा अन्य आरोपों से संबंधित ऑडियो और समाचार वायरल हुए हैं। प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर तथा विभागीय छवि को प्रभावित करने वाला प्रतीत होता है।

डीएसपी मुख्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया हे कि इस संबंध में पूर्व में 5 जून 2026 को बितन्तु संवाद जारी कर सभी थाना एवं कार्यालय प्रभारी को निर्देश दिया गया था कि आईटी प्रोग्रामर से कोई शिकायत हो तो आप शिकायत कर सकते हे , इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर से कोई लिखित शिकायत, ऑडियो, वीडियो अथवा बयान उपलब्ध नहीं कराया गया है।

नए आदेश के तहत सभी थानाध्यक्षों को अपने-अपने थाना एवं कार्यालय में कार्यरत महिला सीसीटीएनएस कर्मियों को मामले की जानकारी देने और यदि किसी प्रकार की प्रताड़ना या परेशान किए जाने की शिकायत हो तो 24 घंटे के भीतर लिखित आवेदन, ऑडियो अथवा वीडियो बयान दर्ज कराने के लिए साइबर थाना, दरभंगा में पदस्थापित पुलिस निरीक्षक श्वेता पोद्दार के समक्ष या उनके मोबाईल नंबर 8877911345 पर  प्रस्तुत कराने का निर्देश दिया गया है।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी थाना या कार्यालय की महिला सीसीटीएनएस कर्मी अथवा प्रोग्रामर की ओर से कोई शिकायत नहीं की जाती है, तब भी संबंधित थाना को शून्य प्रतिवेदन तैयार कर कार्यालय ज्ञापांक और तिथि सहित निर्धारित व्हाट्सएप नंबर पर भेजना सुनिश्चित करें ?यही शून्य वह शब्द हे ,ताकि मामला रफा दफा हो सके ?

यहां बता देना जरूरी हे कि जिले के सभी थानाध्यक्ष भी आईटी प्रोग्रामर से सहमे हुये हे ,अप्रत्यक्ष रूप से कहते हे कि अगर हम सामने आयें तो मुझे ही वरीय पुलिस पदाधिकारी का कोप भाजन होना पड़ेगा ,महिला कर्मी की क्या ओकाद ? आईटी प्रोग्रामर तो खुद को पहले से निर्दोष बता रहा हे और बताएगा भी ,और क्या कहेगा ??

लेकिन सरकारी नंबर पर चैट और बनाया गया ऑडियो इस आरोप के लिये सबूत के लिये काफी हे।यही चैट और ऑडियो किसी सिपाही या दरोगा ,इंस्पेक्टर का वायरल हुआ होता तो अबतक सारी कारवाई हो जाती।

हालांकि दस्तक 7मीडिया किसी ऑडियो का समर्थन नहीं करता हे ,यह ऑडियो और चैट जांच का अंग हे।हालांकि डीआईजी मनोज कुमार तिवारी के कड़े रुख के बाद मुख्यालय डीएसपी ने बितन्तु संवाद के माध्यम से निर्देश जारी किया हे।