बीपीएससी में दरभंगा का परचम: तीसरे प्रयास में प्रशांत शौरभ ने हासिल किया 198वां रैंक, बने राज्य कर सहायक आयुक्त
बीपीएससी में दरभंगा का परचम: तीसरे प्रयास में प्रशांत शौरभ ने हासिल किया 198वां रैंक, बने राज्य कर सहायक आयुक्त
बीपीएससी में दरभंगा का परचम: तीसरे प्रयास में प्रशांत शौरभ ने हासिल किया 198वां रैंक, बने राज्य कर सहायक आयुक्त
दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा
प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का शानदार उदाहरण पेश करते हुए दरभंगा शहर के चित्रगुप्त नगर निवासी ई. प्रशांत शौरभ ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 198वां रैंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है। इस उपलब्धि के साथ उनका चयन राज्य कर सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner of State Tax) के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है। उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार, मित्रों, शिक्षकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
प्रशांत शौरभ की यह सफलता विशेष इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने इसे अपने तीसरे प्रयास में हासिल किया है। लगातार दो प्रयासों के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और पूरे आत्मविश्वास, धैर्य तथा समर्पण के साथ अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने बीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर अपने सपनों को साकार किया।
शैक्षणिक जीवन में भी प्रशांत हमेशा मेधावी रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा एवं स्कूली पढ़ाई जिला स्कूल, दरभंगा से हुई। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने समाज और प्रशासन के क्षेत्र में योगदान देने का सपना देखा और उसी दिशा में लगातार मेहनत करते रहे।
प्रशांत की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास के सामने कठिन से कठिन चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं। उनकी सफलता आज जिले के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत शौरभ ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों, विशेष रूप से अपने अभिभावक समीर कुमार (बब्बू जी), शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं पर विश्वास ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को लक्ष्य तक पहुंचाती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेनी चाहिए। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों तो सफलता देर-सवेर जरूर मिलती है।
प्रशांत शौरभ की इस शानदार उपलब्धि पर क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, समाजसेवियों और गणमान्य लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे दरभंगा जिले को गौरवान्वित किया है।