दाखिल-खारिज में भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा प्रहार, 10 अधिकारियों पर गिरी गाज,

पटना सिटी की तत्कालीन डीसीएलआर पर 15 लाख रिश्वत लेने का आरोप, निलंबन की अनुशंसा

दस्तक 7मीडिया /पटना

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) मामलों में अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई का फैसला लिया है। विभागीय समीक्षा के बाद संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आरोप पत्र गठित करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई चलाने तथा आवश्यक मामलों में निलंबन की अनुशंसा को मंजूरी दी गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार पटना सिटी की तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) अभिलाषा सिन्हा पर दाखिल-खारिज से जुड़े एक अपील वाद को निष्पादित करने अथवा रफा-दफा करने के एवज में बिचौलिये के माध्यम से 15 लाख रुपये रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। मामले की जांच के बाद उनके खिलाफ औपचारिक आरोप तय कर दिए गए हैं तथा सामान्य प्रशासन विभाग को उनके निलंबन की अनुशंसा भेजी गई है।

कार्रवाई की जद में हाजीपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी मुकुल कुमार झा भी आए हैं। उनके खिलाफ पुलिस थाने में दर्ज भ्रष्टाचार से जुड़े मामले के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं औरंगाबाद के सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी नीलकमल कुमार सिन्हा पर प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप में विभाग ने कार्रवाई का निर्णय लिया है।

इसके अलावा राज्य के विभिन्न अंचलों में कार्यरत सात अन्य अधिकारियों एवं राजस्व कर्मियों पर भी दाखिल-खारिज मामलों में जानबूझकर गड़बड़ी करने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने तथा समय पर कार्य निष्पादित नहीं करने के आरोप पाए गए हैं। विभाग ने इनके विरुद्ध भी आरोप पत्र गठित करने और दंडात्मक कार्रवाई की मंजूरी दे दी है।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता को परेशान करने वाले, बिचौलियों के माध्यम से अवैध वसूली करने वाले तथा पद का दुरुपयोग करने वाले किसी भी लोकसेवक को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने के दौरान राजस्व विभाग में करीब 60 अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार तथा कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।