मरीजों की जान से खिलवाड़, बिना मानक धड़ल्ले से चल रहे अवैध निजी क्लिनिक,
बोर्ड पर नामचीन डॉक्टरों के नाम, अंदर संदिग्ध डिग्री
करते हैं इलाज; स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता/ प्रशांत कुमार।

बिरौल अनुमंडल और इसके आस-पास के क्षेत्रों में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे है। विभागीय मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से संचालित हो रहे निजी क्लिनिक और नर्सिंग होम अब केवल मरीजों और उनके परिजनों के ‘आर्थिक शोषण का केंद्र’ बन चुके हैं। यह गोरखधंधा सिर्फ बिरौल तक सीमित नहीं है, बल्कि घनश्यामपुर, कुशेश्वरस्थान सहित अन्य ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में भी माफियाओं द्वारा खुलेआम चलाया जा रहा है।
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बिरौल के आधा दर्जन निजी क्लिनिकों का औचक निरीक्षण किया था। कार्रवाई की भनक लगते ही अधिकांश संचालक अपने क्लिनिक का शटर गिराकर मौके से फरार हो गए। लेकिन, इस पूरी कवायद के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन क्लिनिकों ने शटर गिराकर जांच से बचने की कोशिश की, विभागीय टीम उनकी दोबारा जांच करने क्यों नहीं पहुंची? क्या शटर गिरा देने मात्र से उनके सारे गुनाह माफ हो गए या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए की गई थी?
इन अवैध क्लिनिकों में मरीजों को फंसाने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया गया है। क्लिनिक के बाहर लगे बड़े-बड़े और आकर्षक बोर्डों पर नामचीन और डिग्रीधारक डॉक्टरों (एमबीबीएस, एमडी) के नाम लिखे होते हैं। असलियत में जब मरीज अंदर पहुंचता है, तो उसका इलाज और यहां तक कि ऑपरेशन भी कथित ‘झोलाछाप’ या संदिग्ध डिग्री वाले लोगों द्वारा किया जाता है। यह सीधा-सीधा मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है, जहां इलाज के नाम पर सिर्फ पैसों की उगाही की जाती है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों और सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग निष्पक्षता और पूरी गंभीरता से इन सभी निजी क्लिनिकों के निबंधन, वहां उपलब्ध सुविधाओं और डॉक्टरों की डिग्रियों का भौतिक सत्यापन करे, तो एक बहुत बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हो सकता है। असलियत सामने आने पर कई चौंकाने वाले खुलासे होंगे।
फरार हुए और शटर गिराने वाले सभी क्लिनिकों को तत्काल सील कर उनके संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए। सभी निजी क्लिनिकों के बोर्ड पर अंकित डॉक्टरों की उपस्थिति और उनकी डिग्रियों की अनिवार्य रूप से जांच हो। स्वास्थ्य विभाग एक विशेष टास्क फोर्स का गठन कर ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इन ‘मौत के सौदागरों’ पर लगातार नकेल कसे। जनहित में यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कुंभकर्णी नींद से जागे और आम जनता को इन लुटेरे क्लिनिकों के चंगुल से बचाए।